झारखंड विधानसभा का बजट सत्र प्रारंभ, आर्थिक सर्वे प्रस्तुत होगा, राजनीतिक टकराव की संभावना

झारखंड विधानसभा का बजट सत्र शुरू

बिहार विधानसभा का बजट सत्र आज, 2 फरवरी 2025 से प्रारंभ हो गया है। यह नई NDA सरकार का पहला बजट सत्र है, जो 27 फरवरी तक चलेगा। इस दौरान कुल 19 बैठकें आयोजित की जाएंगी, परंतु शुरुआत में ही सरकार और विपक्ष के बीच टकराव देखने को मिल रहा है। पहले दिन आर्थिक सर्वेक्षण प्रस्तुत किया जाएगा, जबकि राज्य का बजट कल, 3 फरवरी को आना है।

विपक्ष के पास ये 5 बड़े मुद्दे

  • NEET छात्रा रेप-मौत मामला विपक्ष का प्रमुख मुद्दा है।
  • UGC के नए नियमों को लेकर भी हंगामे की संभावना है।
  • सरकार से नौकरी और रोजगार के वादों की पुनरावृत्ति की जाएगी।
  • बुलडोजर एक्शन के चलते गरीबों के उजड़ने के मुद्दे को उठाया जाएगा।
  • बिहार पर बढ़ते कर्ज के संबंध में श्वेत पत्र की मांग की जाएगी।

विपक्ष का आरोप, सरकार का जवाब

राजद और वामदल ने सरकार पर कानून व्यवस्था में गिरावट और गरीब विरोधी नीतियों का आरोप लगाया है। दूसरी ओर, सरकार ने सत्र आरंभ होने से पूर्व ही NEET छात्रा के मामले की जांच CBI को सौंपकर दबाव कम करने की कोशिश की है। डिप्टी सीएम विजय कुमार सिन्हा ने बताया कि परिवार की मांग पर इस मामले को CBI को ट्रांसफर किया गया है।

सत्र का उद्देश्‍य और प्राथमिकताएँ

सत्र की शुरुआत में राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान ने विधानसभा और विधान परिषद के संयुक्त सत्र को संबोधित किया। यह सरकार के लिए अपनी प्राथमिकताएँ रखने का अवसर है, जबकि विपक्ष पहले से ही इसे घेरने की तैयारी में है। आर्थिक मामलों पर सरकार की नीतियों और चुनावी घोषणाओं की परीक्षा इस सत्र के पहले सप्ताह में होने की संभावना है।

बजट की मुख्य बातें

वित्त मंत्री बिजेंद्र यादव 3 फरवरी को वित्तीय वर्ष 2026-27 का बजट पेश करेंगे। इस बजट में ‘मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना’ पर विशेष ध्यान दिया जाएगा, जिसके तहत योग्य महिलाओं को स्वरोजगार के लिए 2 लाख रुपये की सहायता प्रदान करने का प्रावधान हो सकता है। इस पहल के लिए बजट में स substantial राशि आवश्यक्त होगी।

भविष्य की योजनाएँ

इस बजट सत्र में NDA सरकार अपने भविष्य के विकास रोडमैप को स्पष्ट करेगी। पूर्व शीतकालीन सत्र में नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव की अनुपस्थिति के बावजूद, इस बार उनकी सक्रिय भागीदारी की उम्मीद की जा रही है। हालांकि उन्होंने सरकार के कार्यों पर 100 दिन तक टिप्पणी न करने की बात कही थी, लेकिन उनकी भूमिका पर सभी की नजरें बनी हुई हैं।

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