41 आरोपियों के खिलाफ आरोप तय
कोर्ट ने 9 जनवरी को अपने आदेश में स्पष्ट किया कि लालू परिवार सहित 41 व्यक्तियों के खिलाफ पर्याप्त साक्ष्य उपलब्ध हैं। इसी मामले में 52 अन्य लोगों को बरी कर दिया गया। आज की सुनवाई में कई आरोपितों के कोर्ट में हाजिर होने की संभावना है।
कोर्ट की सख्त टिप्पणी
पिछली सुनवाई में विशेष जज विशाल गोग्ने ने कहा कि लालू यादव और उनके परिवार ने आपराधिक गतिविधियों को अंजाम दिया। अदालत के मुताबिक, सरकारी नौकरियों के बदले संपत्ति प्राप्त करने के लिए एक सुनियोजित योजना बनाई गई थी।
नौकरी को सौदेबाजी का हथियार बनाया गया
अदालत ने कहा कि संदेह के आधार पर यह पाया गया है कि लालू प्रसाद यादव ने रेल मंत्री रहते हुए सरकारी नौकरी को अपने परिवार के लिए संपत्ति जमा करने के उद्देश्य से सौदेबाजी का माध्यम बना लिया था।
CBI के दस्तावेजों पर अदालत की राय
राउज एवेन्यू कोर्ट ने CBI की चार्जशीट और दस्तावेजों का अवलोकन करते हुए कहा कि प्रस्तुत की गई जानकारियों से गंभीर आरोप सामने आए हैं। नौकरी और भूमि के बीच संभावित लेन-देन के संकेत स्पष्ट हैं, जिनकी विस्तृत जांच ट्रायल में की जानी चाहिए।
केवल नियुक्ति नहीं, संगठित साजिश का मामला
अदालत ने यह स्पष्ट किया कि यह मामला केवल अनियमित नियुक्तियों तक ही सीमित नहीं है। भूमि हस्तांतरण, मूल्य निर्धारण में गड़बड़ी, और संबंधित व्यापारियों के बीच लेन-देन—इन सभी पहलुओं की जांच आवश्यक है।
आरोप तय होना दोष सिद्ध होना नहीं
कोर्ट ने यह भी कहा कि आरोप तय होने का अर्थ यह नहीं है कि व्यक्ति दोषी है। बचाव पक्ष को ट्रायल के दौरान CBI के साक्ष्यों के खिलाफ अपनी स्थिति व्यक्त करने का पूरा अवसर मिलेगा।
2004 से 2009 के बीच रची गई साजिश
CBI के अनुसार यह साजिश 2004 से 2009 के बीच तैयार की गई, जब लालू यादव रेल मंत्री थे। इस दौरान विभिन्न रेलवे जोनों में ग्रुप-डी पदों पर नियुक्तियां की गईं और इसके बदले में भूमि को लालू परिवार के नाम पर हस्तांतरित किया गया।
परिवार के सदस्यों पर भी आरोप
जांच एजेंसी ने लालू यादव के साथ राबड़ी देवी, तेजस्वी यादव, तेजप्रताप यादव, सांसद मीसा भारती और हेमा यादव के खिलाफ भी चार्जशीट प्रस्तुत की है। उनके खिलाफ आरोप है कि उनकी मौजूदगी में भूमि हस्तांतरण किया गया।
अब आगे क्या होगा
कोर्ट के आदेश के बाद अब इस मामले में ट्रायल शुरू होगा, जिसमें सबूतों और गवाहों के आधार पर अंतिम निर्णय लिया जाएगा। वहीं, लालू यादव के लिए लोअर कोर्ट के निर्णय को हाई कोर्ट में चुनौती देने का विकल्प उपलब्ध है।