चैती छठ पूजा 2026: आज खरना के साथ प्रारंभ होगा 36 घंटे का निर्जला उपवास, कल पहला अर्घ्य।

चैती छठ महापर्व की शुरुआत

पटना: चैती छठ महापर्व की शुरुआत पूरे बिहार, पूर्वी उत्तर प्रदेश सहित कई राज्यों में पारंपरिक श्रद्धा के साथ हो चुकी है। चार दिवसीय इस पर्व का आरंभ नहाय-खाय के साथ हुआ, जिसमें व्रतियों ने पवित्र गंगा में स्नान कर अरवा चावल, चना दाल और कद्दू की सब्जी का सेवन किया। सोमवार को खरना के अवसर पर व्रती 36 घंटे के कठोर निर्जला उपवास का संकल्प लेंगी, जो इस पर्व का सबसे महत्वपूर्ण चरण माना जाता है।

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, यह पर्व सूर्य उपासना और प्रकृति के प्रति आभार का प्रतीक है। इस बार का छठ पर्व ज्योतिषीय दृष्टि से भी विशेष योगों के साथ संपन्न हो रहा है, जिससे इसकी आध्यात्मिक महत्ता बढ़ गई है।

खरना पूजा 2026: शुभ मुहूर्त और महत्व

चैत्र शुक्ल पंचमी को कृत्तिका नक्षत्र और सर्वार्थ सिद्धि योग में खरना पूजा सम्पन्न होगी। इस दिन व्रती पूरे दिन उपवास रहकर संध्या में पूजा करती हैं और गुड़-चावल की खीर और रोटी का प्रसाद ग्रहण करती हैं। इसके बाद 36 घंटे का निर्जला व्रत शुरू होता है, जिसमें जल का भी सेवन नहीं किया जाता। खरना पूजा का शुभ समय शाम 6:01 बजे से 7:29 बजे तक निर्धारित किया गया है। इस अवधि में विधिपूर्वक पूजा करना अत्यंत फलदायी माना जाता है।

अस्ताचलगामी और उदीयमान सूर्य को अर्घ्य का समय

छठ पर्व का मुख्य अनुष्ठान सूर्य देव को अर्घ्य अर्पित करना है। इस वर्ष चैत्र शुक्ल षष्ठी के दिन रोहिणी नक्षत्र और प्रीति योग में श्रद्धालु अस्ताचलगामी सूर्य को अर्घ्य देंगे। श्रद्धालु नदी या तालाब के किनारे डूबते सूर्य को अर्घ्य अर्पित करते हैं। अस्ताचलगामी सूर्य को अर्घ्य देने का समय शाम 6:02 बजे तक रहेगा, जबकि उदीयमान सूर्य को प्रातः 5:57 बजे के बाद अर्घ्य दिया जाएगा। उगते सूर्य को अर्घ्य देने के साथ ही यह महापर्व संपन्न होता है।

पटना में छठ की विशेष तैयारी और जेल से अनोखी पहल

राजधानी पटना में छठ महापर्व के लिए व्यापक तैयारियां की गई हैं। घाटों की सफाई, प्रकाश व्यवस्था और सुरक्षा के विशेष इंतजाम किए गए हैं। इस बीच बेउर जेल से एक अनोखी तस्वीर सामने आई है, जहां 12 महिला कैदियों समेत कुल 22 बंदियों ने छठ व्रत रखा है। जेल प्रशासन ने छठ पर्व के लिए विशेष प्रबंध किए हैं। कारा परिसर में स्थित तालाब को छठ घाट के रूप में सजाया गया है और रंगीन रोशनी से इसे आकर्षक बनाया गया है। व्रतियों को फल-फूल, पूजन सामग्री और नए वस्त्र उपलब्ध कराए गए हैं। प्रशासन के अनुसार, महिला और पुरुष बंदियों के लिए अलग-अलग घाट की व्यवस्था की गई है, जिससे वे पूरी श्रद्धा के साथ पूजा संपन्न कर सकें।

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