धर्मांतरण के लिए लालच नहीं दिया, आदिवासियों के साथ संतुलन अपनाया- चंपाई सोरेन

आदिवासी-मूलवासी समुदाय की आस्था और परंपराएँ

चंपाई सोरेन ने आदिवासी-मूलवासी समुदाय की आपसी आस्था और परंपराओं का उल्लेख करते हुए कहा कि ये समुदाय आपस में पूजा स्थलों पर सिर झुकाते हैं और एक-दूसरे के त्योहारों में भी भाग लेते हैं। इस प्रकार, यहाँ दोनों समुदायों की आस्थाओं का सम्मान किया जाता है।

सामुदायिक समारोहों में सहभागिता

चंपाई सोरेन ने दिउड़ी और रंकिणी मंदिर का उदाहरण देते हुए बताया कि इन स्थानों पर पाहन, अनुष्ठान करते हैं और सनातनी भी पूजा में भाग लेते हैं। पूर्व मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि हम सनातनियों के पर्व-त्योहारों में सक्रिय रूप से हिस्सा लेते हैं। उन्होंने बताया कि आदिवासी-मूलवासी के बीच आपसी आस्थाओं का सम्मान है, यद्यपि उनकी जीवनशैली में कोई परिवर्तन नहीं आया है।

आदिवासी जीवनशैली की विशेषताएँ

चंपाई सोरेन ने आगे कहा कि पेड़ के नीचे पूजा करने वाले आदिवासियों का जन्म, विवाह और मृत्यु तक की जीवनशैली स्पष्ट है। उन्होंने बताया कि नामकरण, विवाह और अंतिम संस्कार जैसे महत्वपूर्ण आयोजनों में मांझी परगना, नायके, पाहन, मानकी, मुंडा और पड़हा राजा की भूमिका होती है। इस प्रकार, आदिवासी संस्कृति और परंपराओं का पालन करते हुए, समुदाय के लोग अपनी आस्थाओं को जीवित रखते हैं।

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