चतरा: स्वास्थ्य प्रणाली पर गंभीर सवाल
झारखंड के चतरा जिले से एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है, जिसने स्वास्थ्य सेवाओं और मानवता को कटघरे में खड़ा कर दिया है। तालाब में डूबने से एक मां और उसकी दो बेटियों की मौत के बाद, सदर अस्पताल में उनके शवों के पोस्टमार्टम के लिए पीड़ित परिवार से अवैध रूप से 5000 रुपये की मांग की गई। इस घटना ने पूरे इलाके में शोक की लहर फैला दी है।
घटनाक्रम का पूरा विवरण
भोज्या गांव में हुई इस त्रासदी के बाद, जब मृतकों के शवों को पोस्टमार्टम के लिए सदर अस्पताल लाया गया, तो वहां तैनात एक स्वीपर ने परिजनों की स्थिति का फायदा उठाते हुए 5000 रुपये की मांग की। मजबूरी में, परिजनों ने 2500 रुपये नकद और 2500 रुपये ऑनलाइन माध्यम से दिए। यह घटना न केवल स्वास्थ्य व्यवस्था की कमजोरी को दर्शाती है, बल्कि इंसानियत की भी कमी को उजागर करती है।
प्रशासन की सख्त कार्रवाई
घटना की जानकारी मिलने पर, उपायुक्त रवि आनंद ने तुरंत कार्रवाई की। उन्होंने सदर SDO जहुर आलम की अध्यक्षता में एक चार सदस्यीय जांच समिति का गठन किया। इस समिति में सिविल सर्जन, अस्पताल उपाधीक्षक और अस्पताल प्रबंधक शामिल हैं। रवि आनंद ने कहा कि किसी भी स्थिति में गरीबों का शोषण सहन नहीं किया जाएगा और दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाएगी।
जांच की दिशा
उपायुक्त ने समिति को 24 घंटे के भीतर विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश दिया। प्रारंभिक जांच में सिविल सर्जन सत्येंद्र सिंहा ने वसूली की पुष्टि की है। अब दोषी कर्मचारियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की तैयारी की जा रही है। इसके साथ ही, दोषी स्वीपर और अन्य संबंधित स्वास्थ्यकर्मियों की पहचान कर उन्हें तत्काल बर्खास्त करने की प्रक्रिया भी शुरू की जाएगी।
सरकार की जीरो टॉलरेंस नीति
चतरा प्रशासन ने इस कार्रवाई के माध्यम से यह स्पष्ट कर दिया है कि सरकारी सेवाओं के नाम पर अवैध वसूली करने वालों को बख्शा नहीं जाएगा। इस त्वरित कार्रवाई के लिए आम जनता ने प्रशंसा की है, लेकिन अस्पताल प्रबंधन की कार्यशैली पर गंभीर सवाल भी उठ रहे हैं कि किस प्रकार एक चतुर्थवर्गीय कर्मचारी के हौसले इतने बुलंद हो गए।