सीएम हेमंत ने राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और राज्यपाल को पत्र लिखकर 2027 की जनगणना में “सरना धर्म” को अलग पहचान देने की अपील की।

सीएम हेमंत सोरेन का सरना धर्म को अलग पहचान देने का प्रयास

रांची: झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने जनगणना 2027 में आदिवासी समुदाय के “सरना धर्म” को विशेष धार्मिक पहचान देने की मांग की है। उन्होंने इस सिलसिले में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राज्यपाल संतोष गंगवार को पत्र लिखा है। अपने पत्र में, सीएम सोरेन ने बताया कि झारखंड और पूरे देश के करोड़ों आदिवासी जनसंख्या लंबे समय से “सरना धर्म” को जनगणना में अलग कोड के रूप में शामिल करने की मांग कर रही है। उनका कहना है कि इस पहल से आदिवासी समाज की धार्मिक पहचान को उचित मान्यता मिलेगी।

जनगणना का महत्व

सीएम ने कहा कि जनगणना केवल जनसंख्या की गणना नहीं होती, बल्कि यह एक महत्वपूर्ण आधार है जिसके माध्यम से नीतियां बनाई जाती हैं। यदि किसी समुदाय की सही पहचान को दर्ज नहीं किया जाता है, तो इससे उनके विकास से संबंधित योजनाओं पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है।

सरना धर्म की पहचान

मुख्यमंत्री ने अपने पत्र में उल्लेख किया कि 2011 की जनगणना में अलग कोड नहीं होने के बावजूद लगभग 50 लाख लोगों ने अपने धर्म के रूप में “सरना” लिखा था। यह संकेत करता है कि इस धर्म के अनुयायियों की संख्या काफी अधिक है और उनकी अलग पहचान आवश्यक है। उन्होंने सरना धर्म की विशेषताओं का भी जिक्र किया, जिसमें प्रकृति पूजा, जल-जंगल-जमीन और पारंपरिक रीति-रिवाज शामिल हैं।

संविधान और आदिवासी पहचान की रक्षा

राष्ट्रपति को लिखे पत्र में, सीएम ने कहा कि संविधान के तहत आदिवासी समाज की सामाजिक, सांस्कृतिक और धार्मिक पहचान की रक्षा करना आवश्यक है। उन्होंने आशा व्यक्त की कि जनगणना के दूसरे चरण में धर्म से संबंधित कॉलम में “सरना धर्म” को अलग कोड देने पर ध्यान दिया जाएगा।

प्रधानमंत्री को पत्र में पुनः मांग

प्रधानमंत्री को अपने पत्र में, सीएम सोरेन ने इस मांग को दोहराया और कहा कि वर्तमान डिजिटल प्रणाली में अलग धर्म कोड जोड़ना संभव है, जिससे आंकड़ों का सही संकलन किया जा सकेगा।

राज्यपाल से सकारात्मक पहल की अपेक्षा

राज्यपाल को पत्र में सीएम ने कहा कि झारखंड की पहचान उसकी आदिवासी संस्कृति और परंपराओं से जुड़ी हुई है। उन्होंने राज्यपाल से अनुरोध किया कि वे इस मुद्दे को राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री के समक्ष उठाएं और सकारात्मक कदम उठाने का प्रयास करें।

संस्कृति की पहचान और नीति निर्माण

मुख्यमंत्री ने कहा कि “सरना धर्म” को अलग पहचान देने से न केवल आदिवासी समाज की सांस्कृतिक अस्मिता मजबूत होगी, बल्कि यह नीति निर्माण में भी सहायक सिद्ध होगा। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि केंद्र सरकार इस मांग पर सकारात्मक निर्णय लेगी।

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