कांग्रेस नेता मोताब शेख की चुनाव जीत और न्यायालय से राहत

पश्चिम बंगाल चुनाव में मोताब शेख की जीत और संघर्ष की कहानी

कोलकाता। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में कांग्रेस नेता मोताब शेख ने अपनी जीत के साथ-साथ संघर्ष की एक प्रेरणादायक कहानी भी प्रस्तुत की है। जहां कांग्रेस को इस चुनाव में केवल दो सीटें मिलीं, वहीं फरक्का विधानसभा सीट से जीत दर्ज करने वाले मोताब शेख ने कानूनी लड़ाई के माध्यम से चुनावी मैदान में कदम रखा।

मतदाता सूची से नाम हटने की चुनौती

चुनाव प्रक्रिया के आरंभ होने से पहले, विशेष गहन पुनरीक्षण के दौरान मोताब शेख का नाम मतदाता सूची से हटा दिया गया था। इसके बाद, उनके सामने सबसे बड़ी चुनौती अपने नाम को पुनः वोटर लिस्ट में शामिल करवाने की थी। कई प्रयासों के बाद, उन्होंने अदालत का दरवाजा खटखटाया।

सुप्रीम कोर्ट में अपील

नामांकन की प्रक्रिया के निकट आने पर, मोताब शेख ने अंतिम उपाय के रूप में भारत के सुप्रीम कोर्ट में अपील दायर की। इसके बाद मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली पीठ ने नवगठित अपीलीय न्यायाधिकरण को मामले की सुनवाई का निर्देश दिया।

अपील का नतीजा और दस्तावेजों की जांच

बताया जाता है कि बंगाल में अपीलीय न्यायाधिकरण 5 अप्रैल को गठित किया गया था, जबकि पहले चरण के नामांकन दाखिल करने की प्रक्रिया अगले ही दिन शुरू होने वाली थी। इस स्थिति में मोताब शेख के पास सीमित समय था। ट्रिब्यूनल में सुनवाई के दौरान, उन्होंने पासपोर्ट सहित कई अन्य दस्तावेज पेश किए। जांच में किसी प्रकार की विसंगति नहीं पाई गई, जिसके बाद उन्हें वैध मतदाता मानते हुए दोबारा मतदाता सूची में शामिल करने का आदेश दिया गया।

चुनाव में जीत हासिल करना

कोर्ट से राहत मिलने के बाद, मोताब शेख ने फरक्का सीट से कांग्रेस के उम्मीदवार के रूप में नामांकन दाखिल किया। चुनाव में उन्होंने भाजपा के प्रत्याशी सुदीप चौधरी को 8,000 से अधिक वोटों से हराकर जीत हासिल की। राजनीतिक परिप्रेक्ष्य में, उनकी कहानी को संघर्ष और किस्मत के अद्भुत मेल के रूप में देखा जा रहा है। विशेष रूप से, यह उल्लेखनीय है कि लगभग 27 लाख लंबित आवेदनों के बीच, उनका मामला सबसे पहले मंजूर होने वालों में शामिल था।

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