कांग्रेस विधायक रामेश्वर उरांव ने पेसा मामले में पार्टी एवं सरकार पर उठाए सवाल

कांग्रेस विधायक रामेश्वर उरांव ने पेसा को लेकर पार्टी और सरकार के खिलाफ खोला मोर्चा, प्रदेश प्रभारी के सामने कहा-मैं किसी बंधन में नहीं बंधा

रांची में कांग्रेस की बैठक: पेसा नियमावली पर विचार-विमर्श

रांची: कांग्रेस के प्रदेश प्रभारी के राजू ने बुधवार को राजधानी रांची में एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की। इस बैठक में राज्य सरकार के द्वारा लागू किए गए पेसा नियमावली पर व्यापक चर्चा हुई। पूर्व मंत्री और लोहरदगा से कांग्रेस विधायक रामेश्वर उरांव ने पार्टी और सरकार पर आलोचना करते हुए पेसा नियमावली के संबंध में अपनी चिंता व्यक्त की।

पेसा नियमावली पर उठे सवाल

रामेश्वर उरांव ने बैठक के दौरान पेसा नियमावली पर प्रश्न उठाते हुए कहा कि वे समाज के साथ हैं और किसी बंधन में नहीं बंधे हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि पेसा नियमावली में कस्टमरी लॉ का पालन नहीं किया जा रहा है। उरांव ने कहा कि यदि पेसा कानून में कोई कमी है, तो वे आम जनता के साथ हैं और समुदाय का समर्थन करेंगे। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि नियमावली में सुधार नहीं किया गया, तो कांग्रेस को इसके नकारात्मक परिणाम भुगतने पड़ सकते हैं।

छत्तीसगढ़ चुनाव से जुड़ी चिंताएं

बैठक में चर्चा के दौरान रामेश्वर उरांव ने छत्तीसगढ़ में पिछली चुनावी हार का जिक्र किया। वहां पेसा कानून पहले से लागू किया गया था, लेकिन नियमावली में चूक के कारण आदिवासी मतदाता कांग्रेस से दूर हो गए। उन्होंने कहा कि पिछले चुनाव में कांग्रेस को 29 में से 26 सीटों पर जीत मिली थी।

पेसा कानून के मूल सिद्धांत

बैठक के बाद मीडिया से बात करते हुए उरांव ने कहा कि पेसा कानून के तहत तीन मुख्य सिद्धांतों का पालन होना चाहिए, जिसमें कस्टमरी लॉ, सामाजिक और धार्मिक प्रथाओं का संरक्षण, और भूमि एवं संसाधनों की पारंपरिक अवधारणा शामिल हैं। हालांकि, पहले दो सिद्धांतों का पालन नहीं किया जा रहा है। उन्होंने पार्टी के प्रभारी से सुधार की उम्मीद जताई।

प्रदेश अध्यक्ष की प्रतिक्रिया

इस विषय पर प्रदेश अध्यक्ष केशव कमलेश महतो ने कहा कि झारखंड में लागू पेसा नियमावली के खिलाफ फैलाई जा रही भ्रांतियों के बारे में जनता को जागरूक करने की आवश्यकता है। उन्होंने जानकारी दी कि अगले एक माह में झारखंड में एसआईआर होने जा रहा है और सभी बीएलए की नियुक्ति की जाएगी। महतो ने गांधी जी के नाम को मिटाने की कोशिशों के ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर पड़ने वाले प्रभावों के प्रति भी लोगों को जागरूक करने पर जोर दिया।

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