पप्पू यादव और निशिकांत दुबे के बीच ट्विटर पर राजनीतिक विवाद
डेस्क: झारखंड के गोड्डा से भाजपा सांसद निशिकांत दुबे और बिहार के पूर्णिया से निर्दलीय सांसद पप्पू यादव के बीच एक्स (ट्विटर) पर आरोप-प्रत्यारोप का सिलसिला जारी है। पप्पू यादव ने निशिकांत दुबे पर उद्योगपतियों के लिए काम करने का आरोप लगाया, जबकि दुबे ने पलटवार में कहा कि पप्पू यादव भाजपा में शामिल होने की कोशिश कर रहे थे। यह विवाद पप्पू यादव की राजनीतिक यात्रा और भाजपा से जुड़ी पूर्व की अफवाहों को पुनर्जीवित कर रहा है।
विवाद का आरंभ
यह विवाद 22 फरवरी 2026 को पप्पू यादव के एक ट्विटर पोस्ट से शुरू हुआ, जिसमें उन्होंने उद्योगपति गौतम अदाणी की देवघर यात्रा का उल्लेख किया। यादव ने कहा कि अदाणी ने मंदिर के दौरे के बाद एक सांसद से मिलकर उद्योगपतियों की दलाली का कार्य किया है, जिससे यह स्पष्ट होता है कि यह सांसद नेहरू-गांधी परिवार के प्रति नकारात्मक प्रचार फैला रहे हैं।
दुबे का प्रतिक्रिया
निशिकांत दुबे ने उसी दिन अपने ट्विटर अकाउंट पर जवाब दिया। उन्होंने कहा कि पप्पू यादव ने संसद सत्र के दौरान उनसे मिलने की कोशिश की थी और उनकी इच्छा भाजपा में शामिल होने की थी। दुबे ने यादव को यह भी याद दिलाया कि उनके चुनाव क्षेत्र में उनके परिवार की जमींदारी है।
पप्पू यादव के बयान
पप्पू यादव ने दुबे के आरोपों का कड़ा विरोध किया और कहा कि कोई भी राजनीतिक दल उनके स्वतंत्रता में बाधा नहीं डाल सकता। उन्होंने दुबे के बयान को राजनीतिक द्वेष का परिणाम बताया।
पुलिसिंग की गहराई और अफवाहें
पप्पू यादव की राजनीतिक यात्रा का आरंभ 1990 के दशक में हुआ। वह कई राजनीतिक पार्टियों से जुड़े रहे, जिसमें आरजेडी प्रमुख है। 2015 में आरजेडी से निष्कासन के बाद से भाजपा से जुड़ने की अफवाहें उड़ रही थीं। पिछले चुनावों में उन्होंने निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर भाग लिया और जीत हासिल की। उनके भाजपा विरोधी बयान हाल के महीनों में बढ़ गए हैं।
निशिकांत दुबे का दृष्टिकोण
निशिकांत दुबे ने पप्पू यादव के आरोपों को राजनीतिक प्रतिस्पर्धा का हिस्सा बताया। उन्होंने राजनीति में मर्यादा बनाए रखने की अपील की और अपने परिवार की जमींदारी का जिक्र किया।
राजनीतिक विश्लेषकों की राय
विश्लेषकों का कहना है कि यह विवाद बिहार की राजनीति में हलचल का संकेत है। पप्पू यादव आंतरिक राजनीति में कांग्रेस के प्रति निष्ठा जताते हैं, जबकि उनकी भाजपा की आलोचना और पुराने कनेक्शंस उनके लिए समस्याएं पैदा कर रहे हैं। इस बीच, संसदीय संवाद की उम्मीद जताई जा रही है।