अस्पताल में अंधेरा, सिस्टम मौन; क्या झारखंड की स्वास्थ्य सेवाएं मोबाइल रोशनी पर निर्भर करेंगी?

सरायकेला-खरसावां में स्वास्थ्य व्यवस्था पर सवाल

राजनगर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र की हालिया घटना ने कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। यह स्वास्थ्य केंद्र, जो ग्रामीण स्वास्थ्य व्यवस्था की महत्वपूर्ण धुरी माना जाता है, वहाँ बुनियादी सुविधाओं की कमी स्पष्ट रूप से दिखी। विशेष रूप से, प्रसव जैसी संवेदनशील परिस्थितियों में डॉक्टर की अनुपस्थिति चिंता का विषय है। ड्यूटी पर तैनात डॉक्टर कुंकल ने मामले को ‘पोस्टपार्टम हेमरेज’ के रूप में वर्गीकृत किया, जो प्रसव के बाद अत्यधिक रक्तस्राव को दर्शाता है। यह स्थिति गंभीर है, लेकिन सवाल यह है कि क्या अस्पताल इस गंभीरता से निपटने के लिए तैयार था?

बुनियादी सुविधाओं की कमी

इस घटना ने यह स्पष्ट कर दिया है कि अस्पताल में आवश्यक बुनियादी सुविधाओं की कमी है, जैसे कि बिजली। यदि अस्पताल में बिजली और अन्य महत्वपूर्ण उपकरण समय पर उपलब्ध होते, तो इस स्थिति का नतीजा क्या होता, यह एक बड़ा प्रश्न है। इस प्रकार की कमी स्वास्थ्य सेवाओं में एक बड़ा व्यवधान पैदा करती है, जो मरीजों के जीवन को खतरे में डाल सकती है।

मातृ मृत्यु दर पर सरकारी दावों की असली तस्वीर

राजनगर सीएचसी की यह घटना स्वास्थ्य विभाग द्वारा किए जा रहे दावों और वास्तविकता के बीच की गहरी खाई को उजागर करती है। सरकारी योजनाओं में मातृ मृत्यु दर को कम करने का वादा किया जाता है, लेकिन जब प्रसव कक्ष में रोशनी नहीं होती, तो ये दावे बेमानी लगने लगते हैं। अब यह जरूरी हो गया है कि केवल कार्रवाई की बात नहीं की जाए, बल्कि जवाबदेही सुनिश्चित की जाए। ताकि भविष्य में किसी प्रसव कक्ष में उचित रोशनी हो और जीवन को बचाने में कोई कमी न रह जाए।

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