शिवलिंग हटाने पर रेलवे अधिकारियों और ग्रामीणों में बहस, सड़क जाम

पटरी दोहरीकरण के कारण हटाया गया था शिवलिंग, विरोध के बाद पुन: रखा गया

बोकारो। चास मुफ्सिल के बांधडीह रेलवे स्टेशन के पास रेलवे ट्रैक के बीचो-बीच स्थापित शिवलिंग को लेकर रेलवे अधिकारियों और ग्रामीणों के बीच बहस हो गई। रेलवे अधिकारियों और ग्रामीणों के बीच हुई तू-तू, मैं-मैं झड़प के बीच आरपीएफ के जवान शिवलिंग को उखाड़ कर अपने साथ ले गए। रेलवे के इस हरकत से ग्रामीणों का गुस्सा सातवें आसमान पर चला गया। गुस्साए ग्रामीणों ने पहले रेलवे दोहरीकरण का कार्य कर रहे मजदूरों को भगाया फिर बांधडीह मोड़ पर सड़क जाम कर दिया। ग्रामीणों का कहना है कि यह शिवलिंग टीटी लाइन बिछाने के करीब 200 साल पहले से यहां स्थापित है। यहां हमारे पूर्वज पूजा अर्चना करते थे। यह हमारी आस्था का केंद्र है और हम अपनी आस्था के साथ खिलवाड़ होते नहीं देख सकते। दरअसल रेलवे पटरी के दोहरीकरण करने को लेकर शिवलिंग को हटाना चाहता था। जबकि ग्रामीण शिवलिंग को किसी दूसरी जगह स्थापित करना चाहते थे। ग्रामीण रेलवे से शिवलिंग स्थापित करने के लिए मंदिर के निर्माण की मांग कर रहे थे। इस संबंध में धनबाद सांसद पीएन सिंह के द्वारा भी मंडल रेल प्रबंधक को सूचना दी गई है। ग्रामीणों ने कहा कि इस जमीन का मुआवजा भी रेलवे प्रबंधन ने अब तक किसी को नहीं दिया है। घटना के संबंध में बताया जा रहा है कि रेलवे अधिकारी शिवलिंग को तत्काल हटाने की बात कर रहे थे। वहीं ग्रामीण खरमास के बाद स्थानांतरण करने पर अड़े थे। इसी बीच तू-तू, मैं-मैं होते ही आरपीएफ के जवानों ने शिवलिंग को उखाड़ कर ले गए। इससे ग्रामीण उग्र हो गए और रेलवे दोहरी करण कार्य कर रहे मजदूरों को भगाया फिर बांधडीह मोड़ पर सड़क जाम कर दिया। घटना की सूचना पर सियालजोरी, बनगड़िया, चास मुफ्सिल समेत छह थाना प्रभारी पहुंचे। पुलिस और ग्रामीणों के बीच हुई वार्ता में सहमति के बाद रेलवे पुलिस ने पुन: शिवलिंग को उसी स्थान पर रख दिया । उसके बाद सड़क जाम हटा लिया गया ।

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