दिल्ली कस्टम के सुपरिटेंडेंट अशोक कुमार ने जीता सिल्वर मेडल

सरकारी नौकरी के व्यस्त और चुनौतीपूर्ण दायित्वों के बावजूद, अगर मन में दृढ़ संकल्प और अनुशासन हो, तो किसी भी आयु में नई ऊँचाइयाँ हासिल की जा सकती हैं। इसकी एक शानदार मिसाल आईजीआई (IGI) एयरपोर्ट, नई दिल्ली के सुपरिटेंडेंट अशोक कुमार ने पेश की है। उन्होंने *ऑल इंडिया सिविल सर्विसेज बेस्ट फिजिक चैंपियनशिप 2025-26* में बेहतरीन प्रदर्शन करते हुए रजत पदक अपने नाम किया है, जिससे उनके विभाग का नाम रोशन हुआ है।

<h2>त्यागराज स्टेडियम में प्रतियोगिता का आयोजन</h2>
<p style="text-align: justify;">यह प्रतिष्ठित राष्ट्रीय स्तर की खेल प्रतियोगिता 17 से 19 फरवरी, 2026 को दिल्ली के त्यागराज स्टेडियम में आयोजित की गई थी। अशोक कुमार ने 50 वर्ष से अधिक उम्र (50+ मास्टर्स कैटेगरी) के खिलाड़ियों के वर्ग में भाग लिया। अपनी उत्कृष्ट फिटनेस के बल पर उन्होंने यह रजत पदक प्राप्त किया। इस राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिता में देशभर के 26 राज्यों और विभिन्न सरकारी बोर्डों से लगभग 170 चुनिंदा एथलीटों ने अपनी प्रतिभा दिखाई। ऐसे कड़े मुकाबले में रजत पदक जीतना अशोक कुमार की कड़ी मेहनत को सिद्ध करता है।</p>

<h2>ड्यूटी के साथ फिटनेस का सामंजस्य</h2>
<p style="text-align: justify;">आईजीआई एयरपोर्ट जैसी हाई-सिक्योरिटी क्षेत्र में एयर कस्टम सुपरिटेंडेंट का पद अत्यंत जिम्मेदारी भरा होता है, जहां कार्य का दबाव हमेशा बना रहता है। अपनी इस महत्वपूर्ण सरकारी ड्यूटी को निभाते हुए राष्ट्रीय स्तर की खेल प्रतियोगिता के लिए शारीरिक रूप से स्वस्थ रहना एक चुनौतीपूर्ण कार्य है। अशोक कुमार की यह उपलब्धि उनके अनुशासन और फिटनेस के प्रति गहरे समर्पण का प्रमाण है।</p>

<h2>इंडियन कस्टम्स के लिए गर्व का क्षण</h2>
<p style="text-align: justify;">अशोक कुमार की इस उपलब्धि ने भारतीय कस्टम्स विभाग का सिर गर्व से ऊँचा कर दिया है। उनकी सफलता बाकी सिविल सेवकों और सरकारी कर्मचारियों के लिए एक प्रेरणा का स्रोत है। उन्होंने सिद्ध किया है कि जनसेवा और अपनी आधिकारिक जिम्मेदारियों के साथ-साथ अपने स्वास्थ्य, फिटनेस और उत्कृष्टता को भी प्रभावी ढंग से संभाला जा सकता है। यह उपलब्धि न केवल दूसरों के लिए प्रेरणा बनेगी, बल्कि भविष्य में ऐसे और उदाहरण भी देखने को मिल सकते हैं। इससे विभागीय स्तर पर खेल संस्कृति को बल मिलेगा और राष्ट्रीय स्तर पर प्रतिभा को प्रोत्साहन मिलेगा। अशोक कुमार की उपलब्धि नई दिशाओं का परिचायक है।<br/>
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