गुमला में नहरों के सुधार और कृषि विकास के लिए नई पहल
गुमला जिले में नहरों की मरम्मत, सोलर सिंचाई के उपाय और मत्स्य विकास को प्रोत्साहित करने के लिए उपायुक्त ने महत्वपूर्ण निर्देश दिए हैं। उन्होंने नहरों की मरम्मत के लिए विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) तैयार करने, सौर ऊर्जा आधारित सिंचाई संसाधनों के विकास और जलाशयों की देखरेख करने वाले कर्मचारियों के पारिश्रमिक को सुनिश्चित करने का आदेश दिया। इसके साथ ही, मत्स्य विकास को बढ़ावा देने के लिए मत्स्यपालक समूहों के गठन, केज निर्माण और स्थानीय समुदाय को मत्स्य पालन के लिए प्रेरित करने पर जोर दिया गया है। उपायुक्त ने यह भी कहा कि जलाशयों के आस-पास की किसी भी भूमि का अनुपयोगी रहना नहीं चाहिए और इसे कृषि एवं अन्य गतिविधियों से जोड़ा जाना चाहिए।
79 किलोमीटर नहर नेटवर्क के जीर्णोद्धार पर जोर
उपायुक्त ने घाघरा प्रखंड के विभिन्न क्षेत्रों में नहरों और डैम संरचनाओं के निरीक्षण के दौरान लीकेज की मरम्मत, डिसिल्टिंग और पुनर्निर्माण के लिए एक सप्ताह के भीतर डीपीआर तैयार करने के निर्देश दिए। उन्होंने 79 किलोमीटर लंबे नहर नेटवर्क के समग्र जीर्णोद्धार पर विशेष ध्यान देने की बात कही, जो कतरी जलाशय से शिवराजपुर डैम तक फैला हुआ है। इसके अतिरिक्त, मसरिया जलाशय का निरीक्षण करते समय उन्होंने आसपास के गांवों को इससे जोड़कर कृषि विस्तार की संभावनाओं को मजबूत करने की दिशा में कदम उठाने की आवश्यकता पर बल दिया। उपायुक्त ने कहा कि जल संसाधनों का संरक्षण और वैज्ञानिक प्रबंधन कृषि विकास के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।