दिवाशी हेंब्रम ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर झारखंड का नाम रोशन किया
जामताड़ा: झारखंड के जामताड़ा जिले के कुंडहित प्रखंड की निवासी दिवाशी हेंब्रम ने थाईलैंड में आयोजित अंतरराष्ट्रीय एयरगन राइफल शूटिंग प्रतियोगिता में शानदार प्रदर्शन कर स्वर्ण पदक जीता है। यह प्रतियोगिता 4 से 7 मई के बीच आयोजित हुई थी, जिसमें दिवाशी ने अंडर-20 बालिका वर्ग में यह उपलब्धि हासिल की। उनके इस ऐतिहासिक प्रदर्शन से न केवल कुंडहित प्रखंड, बल्कि जामताड़ा जिला और झारखंड का नाम भी गर्व से ऊँचा हुआ है।
कुंडहित बस पड़ाव पर भव्य स्वागत
मंगलवार को दिवाशी के गाँव लौटने पर कुंडहित बस पड़ाव पर उनका गरिमामयी स्वागत किया गया। इस अवसर पर प्रखंड प्रशासन, जनप्रतिनिधि और झामुमो कार्यकर्ताओं की बड़ी संख्या उपस्थित रही। स्वागत समारोह में ढोल-नगाड़ों की गूंज और तिरंगे झंडों की लहर के साथ “भारत माता की जय” के उद्घोष से वातावरण गूंज उठा। बीडीओ जमाले रजा, थाना प्रभारी प्रदीप कुमार, पूर्व जिप सदस्य भजहरी मंडल और झामुमो प्रखंड अध्यक्ष अपिश्वर हेंब्रम समेत कई लोग इस आयोजन में शामिल हुए।
माता सिंहवाहिनी मंदिर में आशीर्वाद लिया
स्वागत के बाद, दिवाशी अपने परिवार के साथ कुंडहित बाजार होते हुए माता सिंहवाहिनी मंदिर पहुंचीं। वहां उन्होंने पूजा-अर्चना कर माता का आशीर्वाद लिया। इसके बाद बाजार में उपस्थित लोगों ने उनका अभिवादन किया और उनके साथ सेल्फी एवं फोटो खींचे।
अधिकारियों ने दी शुभकामनाएं
बीडीओ जमाले रजा और थाना प्रभारी प्रदीप कुमार ने दिवाशी को बधाई देते हुए कहा कि यह उपलब्धि पूरे झारखंड के लिए गर्व का विषय है। उन्होंने कहा कि दिवाशी ने अंतरराष्ट्रीय मंच पर स्वर्ण पदक जीतकर क्षेत्र का मान बढ़ाया है और यह उपलब्धि भविष्य के खिलाड़ियों के लिए प्रेरणादायक साबित होगी।
कोच और परिवार को दिया श्रेय
दिवाशी हेंब्रम ने अपनी सफलता का श्रेय अपने माता-पिता और जामताड़ा के कोच एसोसिएशन के अधिकारियों को दिया। उन्होंने कहा कि उनके मार्गदर्शन और समर्थन के बिना यह सफलता संभव नहीं थी। दिवाशी ने बताया कि उनकी इस उपलब्धि की शुरुआत जनवरी 2026 में गोवा में राष्ट्रीय राइफल शूटिंग प्रतियोगिता में स्वर्ण पदक जीतने से हुई थी।
साधारण परिवार से अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी तक का सफर
दिवाशी जामताड़ा के कालिपाथर गांव के एक गरीब किसान सुधीर हेंब्रम की पांच बेटियों में तीसरी संतान हैं। उनकी मां सरस्वती टुडू ने कठिनाइयों के बावजूद सभी बेटियों की शिक्षा पर ध्यान दिया। मिट्टी के घर से निकलकर दिवाशी ने मेहनत और लगन से यह मुकाम हासिल किया है।
प्रेरणा बनी दिवाशी की सफलता
दिवाशी ने अपने साथियों और आदिवासी समाज की बेटियों को आगे बढ़ने की प्रेरणा दी। उन्होंने कहा कि सही मार्गदर्शन और मेहनत से आदिवासी बेटियां भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश का नाम रोशन कर सकती हैं। इसके साथ ही उन्होंने सरकार से ग्रामीण और आदिवासी क्षेत्रों में शूटिंग जैसे खेलों के लिए बेहतर कोचिंग व्यवस्था की मांग की।
गांव में खुशी का माहौल
दिवाशी की इस उपलब्धि से कुंडहित प्रखंड में उत्साह और खुशी का माहौल है। लोग उन्हें उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएं दे रहे हैं और उनकी सफलता को ऐतिहासिक उपलब्धि मान रहे हैं।
उपस्थित थे:
इस अवसर पर बीडीओ जमाले रजा, थाना प्रभारी प्रदीप कुमार, अपिश्वर हेंब्रम, शरम मंडल, संतोष सिंहा, भजहरी मंडल, सुधीर हेंब्रम, बिरबल मुर्मू, स्वपन पाल, रबीन शर्मा, जयदेव हेंब्रम और मुखिया बिमला हांसदा समेत बड़ी संख्या में ग्रामीण उपस्थित थे।