झारखंड: JPSC घोटाले में व्हाट्सएप पर भेजे गए दस्तावेज, बिना टेंडर परीक्षा आयोजन का कार्य।

किसलय शानू

नीट परीक्षा पेपर लीक का मामला और जेपीएससी की जांच

नीट परीक्षा पेपर लीक के मामले में जिम्मेदारी तय कर दी गई है, जिसके चलते छात्रों के दबाव में केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने अपने पद से इस्तीफा दिया है। वहीं, झारखंड में जेपीएससी (JPSC) परीक्षा से संबंधित गड़बड़ियों की खबरें फिर से सामने आई हैं, जहां पेपर लीक की आशंका जताई जा रही है। इस पर कार्रवाई का सिलसिला जारी है।

सीआईडी जांच में नए खुलासे

सीआईडी की जांच में कई नए तथ्य सामने आए हैं, खासकर आरोपी श्वेता कुमारी गुप्ता के संदर्भ में। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के निर्देश पर जेपीएससी परीक्षा घोटाले की जांच की जा रही है। सीआईडी की रिपोर्ट के अनुसार, अप्रैल 2026 में झारखंड सिविल सेवा की प्रारंभिक परीक्षा के परिणाम आने से पहले, श्वेता कुमारी गुप्ता ने 25 मई 2025 को उत्तर कुंजी वाट्सएप पर मो. उस्मान को भेजी थी।

मो. उस्मान टीडीपीएल कंपनी का कर्मचारी है, जिसे जेपीएससी परीक्षा संचालन की जिम्मेदारी सौंपी गई थी। श्वेता कुमारी गुप्ता से सीआईडी ने पूछताछ की है, लेकिन उन्होंने संतोषजनक उत्तर नहीं दिए हैं।

टीडीपीएल कंपनी की भूमिका

टीएसआर डेटा प्रोसेसिंग प्राइवेट लिमिटेड (टीडीपीएल) लखनऊ में स्थित एक आउटसोर्सिंग कंपनी है, जो जेपीएससी की परीक्षाओं में कथित गड़बड़ी के कारण चर्चा में है। सीआईडी की रिपोर्ट के अनुसार, परीक्षा से संबंधित दस्तावेज हार्ड डिस्क या पेन ड्राइव के माध्यम से दिए जाने चाहिए थे, लेकिन श्वेता कुमारी ने कई महत्वपूर्ण दस्तावेज वाट्सएप के माध्यम से भेजने की बात स्वीकार की है।

नॉमिनेशन पर मिली थी जिम्मेदारी

जेपीएससी द्वारा आयोजित प्रतियोगी परीक्षाओं के संचालन के लिए टीडीपीएल को नॉमिनेशन के आधार पर काम दिया गया था, जिसके लिए कोई टेंडर जारी नहीं किया गया था। श्वेता कुमारी गुप्ता ने पूछताछ में बताया कि कंपनी के संबंध में कोई जांच नहीं की गई थी और केवल नॉमिनेशन के आधार पर उन्हें परीक्षा संचालन का कार्य सौंपा गया था।

गिरफ्तारियों का सिलसिला

जेपीएससी मामले में सीआईडी ने अब तक आठ लोगों को गिरफ्तार किया है, जिसमें श्वेता कुमारी गुप्ता और टीडीपीएल का मार्केटिंग मैनेजर मनोज कुमार तिवारी उर्फ अभय कुमार तिवारी, निदेशक रामवीर सिंह, तथा अन्य कर्मचारी शामिल हैं। सीआईडी ने इस दौरान सैकड़ों डिजिटल उपकरण भी जब्त किए हैं, जिन्हें फॉरेंसिक जांच के लिए भेजा जाएगा।

जांच के क्रम में सीआईडी ने जेपीएससी कार्यालय और अन्य स्थानों की छापेमारी की है। सीआईडी की टीम ने पूर्व अध्यक्ष एल. ख्यांगते के सरकारी आवास पर भी छापेमारी की, जहां कई घंटे तक जांच की गई। इस दौरान कई दस्तावेज और डिजिटल साक्ष्य जब्त किए गए हैं, जिनके आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

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