यूके दौरे के दौरान झारखंड की मेगालिथिक धरोहर पर विशेषज्ञों की महत्वपूर्ण बैठक हुई।

📌 गांडीव लाइव डेस्क:

झारखंड की मेगालिथिक विरासत का संरक्षण: यूके दौरे से मिली नई दिशा

झारखंड सरकार के मंत्री सुदिव्य कुमार के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल ने यूनाइटेड किंगडम में महत्वपूर्ण बैठकें कीं। इन बैठकों का मुख्य उद्देश्य झारखंड की प्राचीन मेगालिथ और मोनोलिथ धरोहर के संरक्षण और वैश्विक पहचान को लेकर चर्चा करना था।

बैठकों का उद्देश्य 🌍

इन चर्चाओं में मेगालिथिक स्थलों के वैज्ञानिक दस्तावेजीकरण, संरचनात्मक संरक्षण, परिदृश्य प्रबंधन एवं स्थानीय समुदायों की भागीदारी पर महत्वपूर्ण बिंदुओं पर विचार किया गया। मंत्री ने जोर देते हुए कहा कि आदिवासी समुदायों से जुड़े इन ऐतिहासिक स्थलों को संरक्षित करने के लिए ठोस प्रस्ताव तैयार करना आवश्यक है ताकि इन्हें यूनेस्को विश्व धरोहर सूची में शामिल किया जा सके।

अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों का सहयोग 🤝

इस अवसर पर अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों ने पुरातत्व, विरासत संरक्षण और इंजीनियरिंग में अपने अनुभव साझा किए। उन्होंने दीर्घकालिक संरक्षण रणनीतियों के लिए संस्थागत क्षमता बढ़ाने की दिशा में संभावित सहयोग के क्षेत्रों की पहचान की। इन महत्वपूर्ण सुझावों के आधार पर झारखंड सरकार एक व्यावहारिक रोडमैप तैयार करेगी।

मंत्री का दृष्टिकोण 🌿

सुदिव्य कुमार ने कहा कि मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के नेतृत्व में, राज्य सरकार झारखंड की मेगालिथिक विरासत के संरक्षण और सतत प्रबंधन के प्रति गंभीर है। उन्होंने कहा कि यह धरोहर न केवल पुरातात्विक महत्व रखती है, बल्कि आदिवासी समुदायों की जीवंत सांस्कृतिक पहचान को भी दर्शाती है। इसे आने वाली पीढ़ियों के लिए सुरक्षित रखना सरकार की प्राथमिकता है।

प्रतिष्ठित संस्थानों के साथ बैठकें 🏛️

यूके दौरे के दौरान प्रतिनिधिमंडल ने म्यूज़ियम ऑफ लंदन आर्कियोलॉजी (MOLA), यूनिवर्सिटी कॉलेज लंदन, Wessex Archaeology, AECOM और Arup सहित कई प्रतिष्ठित संस्थानों के साथ चर्चा की। इन बैठकों से झारखंड की विरासत को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता दिलाने के लिए नए अवसरों के द्वार खोले गए हैं।

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