झारखंड में आदिवासी समाज को बांटने की राजनीति पर Babulal Marandi का कड़ा बयान
रांची: नेता प्रतिपक्ष Babulal Marandi ने कांग्रेस और झामुमो पर आदिवासी समुदाय को विभाजित करने का आरोप लगाते हुए उन पर तीखा हमला बोला है। भाजपा के प्रदेश कार्यालय में आयोजित प्रेस वार्ता के दौरान उन्होंने कहा कि समाज को तोड़कर राजनीतिक लाभ उठाने की कोशिशें अब सफल नहीं होंगी।
आदिवासी परंपराओं की रक्षा की आवश्यकता
मरांडी ने कहा कि सरना, सनातन और हिंदू परंपराओं में समानता है और सभी प्रकृति पूजा की परंपरा से जुड़े हुए हैं। उन्होंने यह भी बताया कि पेड़, पहाड़, पत्थर, जल और धरती माता की पूजा आदिवासी समुदाय की आस्था का अभिन्न हिस्सा रही है। उनका दावा था कि “सरना, सनातन और हिंदू में कोई भेद नहीं है, बल्कि यह विविधता में एकता का प्रतीक है।”
कांग्रेस और झामुमो पर आरोप
कांग्रेस और झामुमो को निशाने पर लेते हुए मरांडी ने कहा कि ये दल वोट बैंक की राजनीति के लिए आदिवासी समाज में अलगाव उत्पन्न करने का प्रयास कर रहे हैं। उन्होंने यह आरोप भी लगाया कि राज्य सरकार पेसा कानून की नियमावली के माध्यम से आदिवासी परंपराओं और रूढ़िगत व्यवस्थाओं को कमजोर करने की कोशिश कर रही है।
इतिहास का संदर्भ और आदिवासी पहचान
कांग्रेस पर हमला करते हुए मरांडी ने कहा कि “फूट डालो और राज करो” की नीति अंग्रेजों की थी, और कांग्रेस उसी मानसिकता को आगे बढ़ा रही है। उन्होंने यह भी बताया कि स्वतंत्रता के बाद महात्मा गांधी ने कांग्रेस के समाप्त होने की सलाह दी थी, जिसे नजरअंदाज किया गया।
संस्कृति की सुरक्षा की आवश्यकता
मरांडी ने आदिवासी समाज की मूल पहचान और संस्कृति की रक्षा करने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि सरना, मसना, जाहेरथान और अन्य पूजा स्थलों पर अतिक्रमण और माफियाओं के कब्जे को रोकना आवश्यक है। उन्होंने यह भी दावा किया कि झारखंड के गठन के बाद उनकी सरकार ने जाहेरथान की घेराबंदी और मांझी थान के विकास का कार्य प्रारंभ किया था, जिसे बाद में Raghubar Das की सरकार ने आगे बढ़ाया।
प्रेस वार्ता के दौरान भाजपा के प्रदेश उपाध्यक्ष राकेश प्रसाद और प्रदेश प्रवक्ता राफिया नाज भी उपस्थित रहे।