बिजली सकंट : रोजाना 500 मेगावाट कम मिल रही सप्लाई

झारखंड के उद्योगों को बिजली कटौती से भारी नुकसान, हजारों उद्योग प्रभावित
रांची। राज्य में बिजली संकट थमने का नाम नहीं ले रही है। राज्य के उद्योगों और आमजन को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। बिजली की किल्लत से हर कोई परेशान है, लेकिन समस्या से समाधान का फिलहाल कोई हल निकलता नजर नहीं आ रहा है। हालांकि, सरकार जरूर अपनी गंभीरता बयानों के जरिए जाहिर कर रही है। झारखंड में अगर बिजली कटौती की बात की जाए तो हर जिले का हाला बुरा है राजधानी रांची में करीब 4 से 5 घंटे तक बिजली की कटौती हो रही है तो वहीं दूसरे जिलों का हाल भी काफी बुरा है। 13 सौ मेगावाट बिजली की जरूरत झारखंड को होती है लेकिन इसे लेकर करीब 4सौ से 5 सौ मेगावाट की कमी प्रतिदिन हो रही है, जिस कारण लोगों के साथ साथ व्यावसाई वर्ग को काफी परेशानी हो रही है। खास तौर से बच्ची की पढ़ाई बिजली की कटौती से काफी प्रभावित हो रही है। बच्चों का कहना है शाम को जब उनकी पढ़ाई करने का समय होता है, तभी बिजली गुल हो जाती है। इस कारण स्कूलों में भी टीचर की डांट सुनने को मिलती है। वहीं उनका कहना है कि परीक्षा का भी समय है। ऐसे बिजली कटौती उनके लिए काफी परेशानी का सबब बना हुआ है।
वहीं उद्योगों की स्थिति भी बदतर हो चली है। जहां डीवीसी कमांड एरिया में साल भर उद्यमी बिजली समस्या से परेशान रहते है। वहीं, अब अन्य जिलों में भी बिजली संकट गहराता जा रहा है। रांची, जमशेदपुर, धनबाद और बोकारो जैसे औद्योगिक शहरों में छह से दस घंटे तक की बिजली कटौती हो रही है। औद्योगिक संगठनों की मानें तो हजारों उद्योग इस संकट से परेशान है। उद्योगों में प्रोडक्शन में कमी के कारण नुकसान का सामना भी करना पड़ रहा है। कुछ उद्योगों में जेनरेटर का इस्तेमाल बढ़ने से उत्पादन लागत दो से तीन गुणी बढ़ गयी है। तुपूदाना, नामकुम, इरबा इलाके के उद्योगों की बात करें तो उत्पादन लागत जेनरेटर के इस्तेमाल से बढ़ा है। इसके साथ ही उद्योगों को मिलने वाले डिमांड या आॅर्डर में काफी अंतर आ गया है। बिजली की कमी के कारण लोग आॅर्डर पूरा नहीं कर पा रहे। नतीजा ये है कि लोग अब झारखंड के बजाय दूसरे राज्यों से उत्पाद खरीद रहे हैं। सिर्फ रांची में ही कोकर, नामकुम, तुपुदाना, नगड़ी, ओरमांझी सहित अन्य जगहों के 2,000 से अधिक छोटे-बड़े उद्योगों में काम जारी रखना अब मुश्किल हो रहा है।
राज्य के उद्योगों की निर्भरता बिजली पर अधिक है। यहां आयरन स्पंज, आयरन आॅर, स्टील फर्नेंस, टेक्सटाइल समेत अन्य उद्योग स्थापित है। जो पूरी तरह से बिजली पर निर्भर है। लेकिन पिछले दो महीने से जारी बिजली संकट के दौरान अब उद्योगों को चलना मुश्किल हो गया है। वहीं कामगारों के सामने भी रोजगार की समस्या आने लगी है।

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