आदिवासी के बहाने झारखंड को बांटने की योजना: गीताश्री

📌 गांडीव लाइव डेस्क:

झारखंड में आदिवासी पहचान को लेकर बढ़ा विवाद

आज झारखंड की राजधानी रांची में पूर्व मंत्री गीताश्री उरांव ने कहा कि आदिवासी पहचान के मुद्दे पर झारखंड को दो भागों में बांटने का प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ राजनीतिक दल जानबूझकर कुर्मी समुदाय को प्राथमिकता दे रहे हैं। यह बयान उन्होंने मोरहाबादी मैदान में आयोजित विरोध मार्च और सभा में दिया, जो कि आदिवासी बचाओ मोर्चा और अन्य सामाजिक संगठनों द्वारा कुड़मी समाज को आदिवासी बनाने की मांग के विरोध में आयोजित किया गया था।

कुड़मी समाज की स्थिति

गीताश्री उरांव ने स्पष्ट किया कि किसी भी समुदाय को आदिवासी राज्य में शामिल करने का निर्णय भारत सरकार के गृह मंत्रालय के दिशा-निर्देशों और 18 महत्वपूर्ण मानदंडों पर निर्भर करता है। उन्होंने बताया कि ट्राइबल रिसर्च इंस्टीट्यूट (टीआरआई) की रिपोर्ट और रजिस्ट्रार जनरल ऑफ इंडिया की सलाह भी जरूरी होती है। उनका मानना है कि कुड़मी समुदाय इन मानदंडों में फिट नहीं बैठता, इसलिए उन्हें आदिवासी सूची में शामिल नहीं किया जा सकता।

कुड़मी नेताओं की कार्रवाई पर सवाल

इस मौके पर पूर्व मंत्री देव कुमार धान ने कहा कि कुड़मी समाज के कुछ नेता दबाव के चलते प्रधानमंत्री को गुमराह कर रहे हैं, जो कि पूरी तरह असंवैधानिक है। उन्होंने जनप्रतिनिधियों से इस मुद्दे पर स्पष्टता की मांग की, कि वे कुड़मी आंदोलन का समर्थन करते हैं या आदिवासी समाज के साथ हैं।

आवश्यकता है ठोस कदमों की

सभा में प्रेम शाही मुंडा ने कहा कि आज के आदिवासी पलायन और बेरोजगारी जैसी बड़ी समस्याओं का सामना कर रहे हैं, जबकि राज्य के आदिवासी मंत्री और विधायक इस दिशा में कोई प्रभावी कदम नहीं उठा पा रहे हैं। वक्ताओं ने जनप्रतिनिधियों से स्पष्ट रुख अपनाने का आग्रह किया।

आंदोलन की भविष्य की रणनीति

सभा में आंदोलन की अगली रणनीति भी तय की गई। यह निर्णय लिया गया कि 26 सितंबर को सिरम टोली सरना स्थल में एक बैठक होगी, तथा कुड़मी समाज को एसटी सूची में शामिल करने के खिलाफ विरोध जारी रखने का संकल्प लिया गया।

इस कार्यक्रम में कई प्रमुख नेता और कार्यकर्ता उपस्थित थे, जिसमें देव कुमार धान, प्रेम शाही मुंडा, दर्शन गझु और अन्य शामिल थे।

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