सरकार ने नया IT नियम जारी किया: AI कंटेंट का लेबलिंग अनिवार्य, टेकडाउन अवधि कम की गई

सरकार ने AI उत्पन्न सामग्री के लिए नए नियम बनाए

सरकार ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) द्वारा निर्मित सामग्री के संबंध में नए नियमों की घोषणा की है। इन नियमों के तहत, सभी AI-जनित सामग्री, जैसे डीपफेक वीडियो, सिंथेटिक ऑडियो और विभिन्न विजुअल्स, को स्पष्ट लेबलिंग के साथ प्रस्तुत करना अनिवार्य होगा। यह नियम गजट नोटिफिकेशन G.S.R. 120(E) के माध्यम से जारी किए गए हैं, जिन पर जॉइंट सेक्रेटरी अजीत कुमार के हस्ताक्षर हैं। नए नियम 20 फरवरी 2026 से प्रभावी होंगे।

AI-जनित सामग्री का अर्थ

सरकार ने ‘सिंथेटिक रूप से निर्मित जानकारी’ की आधिकारिक परिभाषा दी है, जिसे AI-जनित सामग्री के रूप में जाना जाता है। इसमें वह सभी ऑडियो, वीडियो या ऑडियो-वीजुअल सामग्री शामिल है, जो कंप्यूटर के माध्यम से बनाई या संशोधित की गई है और जो वास्तविकता की झलक देती है, जैसे कि किसी व्यक्ति या घटना को असली तरीके से प्रस्तुत करना। हालांकि, रंग सुधारने, आवाज को साफ करने या अनुवाद जैसी प्रक्रियाएं AI कंटेंट के अंतर्गत नहीं आतीं, बशर्ते कि इनसे मूल अर्थ में कोई परिवर्तन न आया हो।

सोशल मीडिया प्लेटफार्मों पर नए नियमों का प्रभाव

बड़े सोशल मीडिया प्लेटफार्मों, जैसे Instagram, YouTube और Facebook, अब कड़े नियमों का पालन करने के लिए बाध्य होंगे। नए नियम 4(1A) के अनुसार, किसी यूजर के पोस्ट को अपलोड करने से पहले प्लेटफॉर्म को यह पूछना होगा कि क्या यह सामग्री AI-जनित है। इसके अलावा, प्लेटफार्मों को ऑटोमेटेड टूल्स भी शामिल करने होंगे, जो सामग्री के स्वरूप, स्रोत और स्वभाव का सत्यापन करेंगे। यदि सामग्री AI-जनित पाई जाती है, तो उस पर स्पष्ट डिस्क्लोजर टैग लगाना आवश्यक होगा।

नए नियमों में समयसीमा में परिवर्तन

नए नियमों के तहत, प्लेटफार्मों को कानूनी आदेशों पर कार्रवाई करने के लिए केवल तीन घंटे का समय दिया जाएगा, जबकि पहले यह समय 36 घंटे था। 15 दिन की समय सीमा अब घटकर सात दिन रह गई है, और 24 घंटे की डेडलाइन 12 घंटे की कर दी गई है।

ये नए नियम सीधे सिंथेटिक कंटेंट से संबंधित अपराध कानूनों से जुड़े हुए हैं। बच्चों के यौन शोषण, अश्लीलता, झूठे इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड या किसी की पहचान को गलत तरीके से पेश करने वाले डीपफेक जैसे मामलों में अब ये नियम भारतीय न्याय संहिता, POCSO अधिनियम और विस्फोटक पदार्थ अधिनियम के अंतर्गत आएंगे।

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