हाई कोर्ट का आदेश: सरकार को पेंशन का बकाया और 6% ब्याज चुकाने का निर्देश

रांची: झारखंड उच्च न्यायालय ने लघु सिंचाई विभाग के पूर्व कर्मियों की पेंशन से जुड़ी एक महत्वपूर्ण मामले में निर्णय सुनाया है। न्यायालय की पीठ में चीफ जस्टिस एमएस सोनक और जस्टिस राजेश शंकर शामिल थे, जिन्होंने कहा कि सरकार लोक अदालत के आदेशों की अनदेखी नहीं कर सकती। अदालत ने राज्य सरकार को निर्देश दिया कि पेंशन की बकाया राशि का भुगतान किया जाए और इस पर 6 प्रतिशत सालाना ब्याज भी दिया जाए।

लोक अदालत के आदेश का पालन आवश्यक: अदालत

अदालत ने अपने निर्णय में स्पष्ट किया कि नेशनल लोक अदालत का आदेश अंतिम और बाध्यकारी होता है। सरकार ने इस आदेश को न तो चुनौती दी और न ही इसे लागू किया। इसलिए, तकनीकी कारणों से राहत से इनकार करना अनुचित है। अदालत ने यह भी कहा कि सरकार अपने दायित्व से बचने का प्रयास नहीं कर सकती।

मामले का संक्षिप्त विवरण

यह मामला जुबली देवी और अन्य याचिकाकर्ताओं द्वारा 2023 में उच्च न्यायालय में दायर किया गया था। याचिकाकर्ताओं की मांग थी कि उनकी पेंशन की गणना प्रारंभिक नियुक्ति, अर्थात दैनिक भोगी के रूप में उनकी सेवा अवधि से की जाए, न कि उनके नियमितीकरण की तारीख से।

लोक अदालत द्वारा पूर्व में दिया गया आदेश

यह मामला बाद में नेशनल लोक अदालत में पहुंचा, जहां 13 जुलाई 2024 को आदेश दिया गया कि सरकार को पेंशन लाभ प्रदान करना होगा। हालांकि, इसके बावजूद सरकार ने इस आदेश को लागू नहीं किया।

याचिका दो बार खारिज, अंततः मिली राहत

सरकार द्वारा आदेश का पालन न करने पर याचिकाकर्ताओं ने अवमानना याचिका दायर की, लेकिन वह समाप्त कर दी गई। इसके बाद 2025 में याचिका फिर से प्रस्तुत की गई, जिसे खारिज कर दिया गया। अंततः इस निर्णय के खिलाफ अपील की गई, जिस पर सुनवाई करते हुए उच्च न्यायालय ने अब पूर्व कर्मचारियों के पक्ष में निर्णय दिया है।

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