ऑपरेशन नवजीवन-II का प्रभाव: झारखंड में 16 माओवादियों ने छोड़ी हिंसा, अपनाया मुख्यधारा का मार्ग।

रांची: झारखंड में नक्सलवाद के खिलाफ चल रही लड़ाई में एक सकारात्मक विकास हुआ है। ऑपरेशन ‘नवजीवन-II’ के अंतर्गत 16 माओवादी हिंसा का रास्ता छोड़कर मुख्यधारा में लौट आए हैं। 28 जुलाई को इन सभी ने झारखंड पुलिस के समक्ष आत्मसमर्पण किया। आत्मसमर्पण करने वालों में 11 पुरुष और 5 महिलाएं शामिल हैं, जो संगठन के विभिन्न स्तरों पर सक्रिय रहे हैं।

हथियारों और गोलियों का समर्पण

आत्मसमर्पण करने वाले माओवादियों ने केवल अपनी गतिविधियों को समाप्त नहीं किया, बल्कि अपने पास मौजूद 11 हथियार और 1562 राउंड गोलियां भी पुलिस को सौंप दीं। इनमें 6 इंसास राइफल, 2 AK-47, एक HK-33, एक US कार्बाइन और एक M-16 राइफल शामिल हैं। आत्मसमर्पण करने वाले 14 माओवादी कोल्हान और सारंडा क्षेत्र में सक्रिय थे, जबकि 2 लातेहार जिले में थे। पुलिस के अनुसार, इनमें से कई को इन क्षेत्रों के जंगलों और पहाड़ियों की अच्छी जानकारी थी। अब उन्होंने सामान्य जीवन की ओर लौटने का निर्णय लिया है, और सरकार की पुनर्वास नीति के तहत उन्हें नए अवसर मिलेंगे।

अन्य माओवादियों का आत्मसमर्पण

झारखंड पुलिस के अनुसार, इस दस्ते के 8 अन्य माओवादी छत्तीसगढ़ में भी आत्मसमर्पण करने जा रहे हैं, जिनमें 3 पुरुष और 5 महिलाएं शामिल हैं। पुलिस का मानना है कि इतने माओवादियों का एक साथ मुख्यधारा में लौटना संगठन के लिए एक महत्वपूर्ण झटका है। इससे कोल्हान, सारंडा और आस-पास के क्षेत्रों में शांति और सुरक्षा की स्थिति मजबूत होने की उम्मीद है।

आत्मसमर्पण करने वाले 16 व्यक्तियों में से 15 झारखंड के विभिन्न जिलों के स्थानीय निवासी हैं। इनमें पश्चिमी सिंहभूम, लातेहार, लोहरदगा, हजारीबाग, खूंटी, बोकारो, रांची, सरायकेला-खरसावां और गिरिडीह शामिल हैं। एक सदस्य ओडिशा के सुंदरगढ़ जिले का निवासी है।

2026 में आत्मसमर्पण के आंकड़े

झारखंड पुलिस के आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2026 में अब तक 45 नक्सलियों ने आत्मसमर्पण किया है, जबकि 93 नक्सलियों को गिरफ्तार किया गया है। इस वर्ष अब तक 22 नक्सली मुठभेड़ में मारे गए हैं। पुलिस का कहना है कि लगातार चल रहे अभियानों और आत्मसमर्पण एवं पुनर्वास नीति के कारण कई नक्सली अब सामान्य जीवन की ओर लौट रहे हैं।

इससे पहले 21 मई 2026 को 27 नक्सली कमांडर और दस्ते के सदस्यों ने भी आत्मसमर्पण किया था। जुलाई में 20 लाख रुपये के इनामी माओवादी कमांडर रविंद्र गंझू की गिरफ्तारी और 25 लाख रुपये के इनामी कमांडर अजय महतो उर्फ टाइगर की गिरफ्तारी भी हुई थी।

गंभीर नक्सली घटनाओं में शामिल

पुलिस ने बताया कि आत्मसमर्पण करने वाले माओवादी पश्चिमी सिंहभूम जिले में हुए गंभीर नक्सली मामलों में शामिल रहे हैं। इनमें 2021 में टोकलो के लांजी जंगल में IED विस्फोट शामिल है, जिसमें झारखंड जगुआर के 3 जवान शहीद और 3 घायल हुए थे।

इसके अलावा, 2020 में कराईकेला इलाके में ग्रामीण कृष्णा सवैया की हत्या, 2022 में गोईलकेरा इलाके में पूर्व विधायक गुरुचरण नायक के दो अंगरक्षकों की हत्या और सुरक्षाबलों के हथियार लूटने जैसी घटनाएं भी इनसे जुड़ी हैं। 2021 में गोईलकेरा के केतापी इलाके में वन विभाग की JCB मशीन जलाने और एक मुंशी की हत्या का मामला भी पुलिस द्वारा उल्लेखित किया गया है।

इसके अतिरिक्त, 2023 में तुम्बाहाका और हुसीपी के जंगलों में सुरक्षाबलों के साथ मुठभेड़, 2024 में ग्रामीण की हत्या और 2025 में कई IED विस्फोटों में भी इन आत्मसमर्पित माओवादियों के नाम शामिल हैं।

कोल्हान-सारंडा में शांति की संभावनाएं

कोल्हान और सारंडा क्षेत्र लंबे समय से नक्सलवाद की समस्या का सामना कर रहा है। लेकिन अब यहां स्थितियों में बदलाव की उम्मीद बढ़ रही है। सुरक्षाबलों के निरंतर अभियानों और सरकार की पुनर्वास नीति का असर दिखाई दे रहा है। जो लोग कभी हथियार लेकर जंगलों में चले गए थे, वे अब समाज का हिस्सा बनने का रास्ता चुन रहे हैं।

झारखंड पुलिस ने बचे हुए माओवादियों से भी अपील की है कि वे हिंसा और भय का रास्ता छोड़कर मुख्यधारा में लौटें और सरकार की आत्मसमर्पण एवं पुनर्वास नीति का लाभ उठाएं। ऑपरेशन ‘नवजीवन-II’ के तहत 16 माओवादियों का यह आत्मसमर्पण झारखंड में सकारात्मक बदलाव की एक महत्वपूर्ण मिसाल है।

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