हजारीबाग वन भूमि घोटाले में ACB ने 13 सरकारी गवाहों को बनाया, विनय चौबे पर दवाब डालने का आरोप

हजारीबाग वन भूमि घोटाले में एसीबी की चार्जशीट दाखिल

रांची: हजारीबाग वन भूमि घोटाले के संदर्भ में एंटी करप्शन ब्यूरो (एसीबी) ने विशेष अदालत में 14 पन्नों की चार्जशीट प्रस्तुत की है। इस चार्जशीट में एसीबी ने 13 गवाहों की सूची भी शामिल की है, जिसमें तत्कालीन अंचल अधिकारी, राजस्व कर्मी और एसीबी के डीएसपी जैसे अधिकारी शामिल हैं।

विनय कुमार सिंह की रिहाई और आरोप

नेक्सजेन कंपनी के मालिक विनय कुमार सिंह को सुप्रीम कोर्ट से जमानत मिलने के बाद जेल से रिहा किया गया। एसीबी ने विभिन्न गंभीर आरोपों के तहत केस दर्ज किया था। चार्जशीट में कहा गया है कि हजारीबाग के तत्कालीन डीसी विनय चौबे ने विनय सिंह की पत्नी के नाम पर खरीदी गई वन भूमि की जमाबंदी के लिए अपने अधीनस्थ अधिकारियों पर दबाव डाला। इनकी साझेदारी 2010 से 2013 तक रही। एसीबी का दावा है कि विनय चौबे और विनय सिंह के बीच व्यावसायिक संबंध रहे हैं।

4 करोड़ रुपए का लेनदेन और दस्तावेज

एसीबी ने चार्जशीट में यह भी उल्लेख किया है कि विनय चौबे की पत्नी स्वप्ना संचिता, उनके साले शिपिज त्रिवेदी और अन्य पारिवारिक सदस्यों तथा विनय सिंह की कंपनी के बीच करोड़ों रुपए के लेनदेन के दस्तावेज भी उपलब्ध कराए गए हैं। यह भी दिखाया गया है कि चौबे और उनके परिवार के सदस्यों के साथ विनय सिंह की कंपनी के बीच 50 से अधिक बैंकिंग लेनदेन हुए हैं।

अवैध जमाबंदी की पुष्टि

चार्जशीट में यह भी स्पष्ट किया गया है कि चौबे के कार्यकाल के दौरान वन विभाग की भूमि के पांच प्लाटों की अवैध तरीके से जमाबंदी की गई थी, जो कि गैरमजरूआ खास के रूप में दर्ज थी। वन संरक्षण अधिनियम के अनुसार, बिना भारत सरकार की अनुमति के ऐसी भूमि का उपयोग गैर वानकी कार्यों के लिए नहीं किया जा सकता। आरोपितों की मिलीभगत से यह अवैध प्रक्रिया संपन्न हुई। मामले के उजागर होते ही 2013 में सभी अवैध जमाबंदियों को रद्द कर दिया गया था। एसीबी ने प्रारंभिक जांच के बाद 25 सितंबर 2025 को सरकार से मंजूरी प्राप्त कर हजारीबाग थाना कांड संख्या 11/25 के तहत प्राथमिकी दर्ज की थी।

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