पाकुड़ सदर अस्पताल में डायलिसिस का समय 4 घंटे की बजाय 2 घंटे हो गया, बिजली-पानी की कमी से मशीनें बंद।

पाकुड़ में डायलिसिस सेवा पर संकट

पाकुड़ सदर अस्पताल में स्थित नि:शुल्क डायलिसिस सेंटर में किडनी के मरीजों को गंभीर समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। मरीजों और उनके परिवारों का आरोप है कि अस्पताल में पानी और बिजली की भारी कमी के कारण डायलिसिस जैसी महत्वपूर्ण प्रक्रिया को समय से पहले रोक दिया जा रहा है, जिससे मरीजों की जान को खतरा हो रहा है।

डायलिसिस की निर्धारित अवधि में कमी

किडनी के मरीजों का कहना है कि सामान्यतः एक डायलिसिस प्रक्रिया लगभग चार घंटे तक चलनी चाहिए, लेकिन पाकुड़ सदर अस्पताल में इसे घटाकर केवल डेढ़ से दो घंटे तक सीमित कर दिया गया है। डायलिसिस कराने आए कैलाश महतो ने बताया कि उनकी प्रक्रिया केवल डेढ़ घंटे चली। जब उन्होंने इसका विरोध किया तो अस्पताल प्रबंधन ने पानी और बिजली की समस्या का हवाला दिया। उनका कहना था कि बोरिंग और संसाधनों की कमी के चलते पूरा उपचार संभव नहीं हो पा रहा है।

संसाधनों की कमी की पुष्टि

डायलिसिस यूनिट के इंचार्ज धनंजय इंदी ने भी अस्पताल में संसाधनों की कमी को स्वीकार किया है। उन्होंने जानकारी दी कि एक मरीज के डायलिसिस के लिए लगभग 200 लीटर शुद्ध पानी की आवश्यकता होती है। गर्मी के मौसम में भूजल स्तर के गिरने से पानी की गंभीर किल्लत उत्पन्न हो गई है। इसके साथ ही, जिले में लगातार बिजली कटौती और आंधी-तूफान के कारण भी बिजली की आपूर्ति बाधित हो रही है, जिससे डायलिसिस मशीनें बीच में ही बंद हो जाती हैं। उन्होंने यह भी बताया कि मजबूरी में पहले शिफ्ट के मरीजों को केवल दो घंटे तक ही डायलिसिस दिया जा रहा है।

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