झारखंड में अत्याचार: महिला और नवजात की जघन्य हत्या
डेस्क: झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम जिले में अंधविश्वास और बर्बरता की एक दिल दहलाने वाली वारदात सामने आई है। कुमारडूंगी थाना क्षेत्र के कलाईया गांव में डायन के आरोप में 32 वर्षीय एक महिला और उसके दो महीने के नवजात शिशु को पेट्रोल डालकर जिंदा जला दिया गया। इस घटना में महिला का पति गंभीर रूप से झुलसने के बावजूद जान बचाने में सफल रहा।
12 आरोपियों का आत्मसमर्पण
बुधवार को इस खौफनाक घटना का खुलासा हुआ, जब 12 ग्रामीण स्वयं कुमारडूंगी थाना पहुंचकर आत्मसमर्पण कर दिया। आरोपियों ने पुलिस के सामने खुलासा किया कि उन्होंने महिला को डायन मानकर उसे खत्म करने की योजना बनाई और उसे अंजाम दिया। पुलिस ने सभी आरोपियों को तुरंत हिरासत में ले लिया है। चाईबासा के डीएसपी रेफरल मुर्मू ने इस मामले को अंधविश्वास का एक गंभीर उदाहरण बताया।
आधी रात का हमला
पुलिस से मिली जानकारियों के अनुसार, गांव में कुछ लोगों की बीमारी और मवेशियों की मौत को लेकर अफवाहें फैल चुकी थीं। ग्रामीणों का एक समूह उस महिला को इसके लिए दोषी ठहराने लगा था। मंगलवार की आधी रात जब पूरा परिवार सो रहा था, तब करीब 12 लोगों का एक समूह हथियारों और पेट्रोल के साथ उसके घर में घुस गया। हमलावरों ने सो रहे परिवार पर पेट्रोल छिड़ककर आग लगा दी। आग इतनी तेज हुई कि महिला और उसका नवजात घर से बाहर निकलने तक का मौका नहीं मिला और वे जिंदा जल गए।
क्षेत्र में दहशत का माहौल
इस घटना के बाद कुमारडूंगी क्षेत्र में सनसनी और दहशत का माहौल है। तनाव को देखते हुए प्रशासन ने अतिरिक्त पुलिस बल तैनात कर दिया है। बुधवार सुबह वरीय पुलिस अधिकारी घटनास्थल पर पहुंचे और साक्ष्य जुटाने के लिए फॉरेंसिक टीम और डॉग स्क्वायड की सहायता ली जा रही है ताकि आरोपियों के खिलाफ ठोस सबूत इकट्ठा किए जा सकें।
पुलिस अधिकारियों की प्रतिक्रिया
चाईबासा के डीएसपी रेफरल मुर्मू ने बताया कि यह मामला पूरी तरह अंधविश्वास से प्रेरित है। उन्होंने कहा कि अब तक चार मुख्य आरोपियों को औपचारिक रूप से हिरासत में लिया गया है, जबकि अन्य 8-10 आरोपियों से गहन पूछताछ की जा रही है। पुलिस ने स्पष्ट किया है कि डायन प्रथा के नाम पर किसी भी तरह की हिंसा करने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। मामला हत्या, हत्या के प्रयास और डायन प्रतिषेध अधिनियम की गंभीर धाराओं के तहत दर्ज की जा रही है।