झारखंड में भ्रष्टाचार के खिलाफ बड़ी कार्रवाई
डेस्क: झारखंड में विजिलेंस द्वारा निरंतर भ्रष्टाचार के मामलों में कार्रवाई की जा रही है। हाल ही में, मुजफ्फरपुर में एक महत्वपूर्ण घटना सामने आई, जहां विशेष विजिलेंस यूनिट ने सदर थाने के दारोगा भास्कर कुमार मिश्रा को 15 हजार रुपये की रिश्वत लेते रंगे हाथ गिरफ्तार किया। यह कार्रवाई एक पीड़ित से पैसे लेते समय की गई। पिछले दिन ही जिला कृषि पदाधिकारी को भी 50 हजार रुपये की रिश्वत लेते पकड़ा गया था, जिससे प्रशासन में हड़कंप मच गया है।
जारोगा की गिरफ्तारी का विवरण
आईपीएस अधिकारी भास्कर कुमार मिश्रा जो 2019 बैच के सब इंस्पेक्टर हैं, को 15 हजार रुपये की घूस लेते गिरफ्तार किया गया। यह गिरफ्तारी सदर थाना क्षेत्र के पास स्थित एक चाय की दुकान पर की गई, जहाँ उन्होंने पैसे लेने का प्रयास किया। उनकी गिरफ्तारी ने फिर से पुलिस और प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
अपहरण मामले में रिश्वत की मांग
गिरफ्तारी का मामला एक बच्चे के अपहरण से जुड़ा है, जो सदर थाना क्षेत्र में दर्ज किया गया था। सब इंस्पेक्टर भास्कर कुमार मिश्रा इस केस के अनुसंधानकर्ता थे। पीड़ित के भाई, अमन कुमार, ने बताया कि आरोपी का नाम केस डायरी में था, जिसे हटाने के लिए दारोगा ने 50 हजार रुपये की मांग की। अमन कुमार ने रिश्वत देने में असमर्थता जताई, लेकिन अंततः 30 हजार रुपये पर सहमति बनी।
गोपनीय शिकायत और गिरफ्तारी की प्रक्रिया
अमन कुमार ने पटना में निगरानी विभाग से शिकायत की, जिसके बाद मामले का सत्यापन किया गया। सत्यापन में रिश्वत मांगने की पुष्टि होने पर, निगरानी की टीम ने कार्रवाई की योजना बनाई। अमन ने जब पहले किस्त के रूप में 15 हजार रुपये देने के लिए चाय की दुकान पर पहुंचे, तब निगरानी की टीम ने उन्हें गिरफ्तार किया।
भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत कार्रवाई
निगरानी विभाग के डीएसपी संजय कुमार ने पुष्टि की कि दारोगा भास्कर कुमार मिश्रा को रंगे हाथ पकड़ा गया है और उनके पास से रिश्वत की रकम बरामद की गई है। गिरफ्तारी के बाद आरोपी को पटना लाया गया है, जहाँ उनसे पूछताछ की जा रही है। इस कार्रवाई ने पुलिस की कार्यप्रणाली को एक बार फिर से चुनौती भरे सवालों में डाल दिया है।

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