📌 गांडीव लाइव डेस्क:
जमशेदपुर: झारखंड मूलवासी अधिकार मंच की कार्रवाई
टाटा कंपनी के लीज नवीनीकरण को लेकर झारखंड मूलवासी अधिकार मंच ने जमशेदपुर के डीसी को ज्ञापन सौंपकर अपनी आपत्ति दर्ज कराई है। मंच की ओर से स्पष्ट किया गया है कि जब तक मूलवासी, रैयत और विस्थापितों के अधिकारों की सुरक्षा नहीं की जाती, तब तक लीज नवीनीकरण की प्रक्रिया को आगे बढ़ाना उचित नहीं होगा। मंच के प्रतिनिधि दीपक रंजीत ने कहा कि प्रशासन द्वारा लगातार उनकी मांगों की अनदेखी की जा रही है। यदि मांगों को गंभीरता से नहीं लिया गया तो 20 फरवरी को बिष्टूपुर पोस्टल पार्क के पास एक दिवसीय धरना-प्रदर्शन का आयोजन किया जाएगा।
मूल खतियानधारियों के حقوق का उल्लंघन
मंच के संयोजक हरमोहन महतो ने बताया कि जमशेदपुर के कदमा क्षेत्र में स्थित जगन्नाथ मंदिर की भूमि, जिस पर 26 फरवरी को राष्ट्रपति का भूमि पूजन कार्यक्रम प्रस्तावित है, वह भूमि 1908 के मूल खतियान में हेम महतो के नाम पर दर्ज है। बाद में गलत सर्वे के माध्यम से इसे सरकारी घोषित किया गया, जो मूल खतियानधारियों के अधिकारों का उल्लंघन है।
खतियानी जमीन का परिवर्तनीय उपयोग
महतो ने कहा कि यह मामला अकेला नहीं है; जमशेदपुर के कई क्षेत्रों में ऐसे मूल खतियानी भूमि को लीज के आधार पर गलत तरीके से आवंटित किया गया है। मंच की मांग है कि इन जमीनों की निष्पक्ष जांच की जाए और मूल खतियानधारियों को उनकी संपत्ति लौटा दी जाए। मंच ने यह भी कहा कि पेसा कानून, सीएनटी अधिनियम, और संविधान की पांचवीं अनुसूची के तहत बिना ग्रामसभा की सहमति और रैयतों की भागीदारी वाले किसी भी निर्णय को अवैध माना जाएगा।
आवश्यक मांगें
मंच ने टाटा कंपनी के लीज नवीनीकरण की प्रक्रिया पर तुरंत रोक लगाने, 1908 के सभी मूल खतियानों के आधार पर विवादित जमीनों की जांच कराने, और विस्थापितों को पुनर्वास व रोजगार का अधिकार देने की मांग की है।
प्रतिनिधिमंडल में ये सहयोगी शामिल थे
इस ज्ञापन में प्रमुख रूप से हरमोहन महतो, अशोक गोप, प्रहलाद गोप, तपन पंडा, समेत अन्य कई सदस्यों का सहयोग रहा।
यह घटनाक्रम स्थानीय प्रशासन के लिए एक स्पष्ट संकेत है कि मूलवासी अधिकारों की अनदेखी करना अब सहन नहीं किया जाएगा। 🛑