जमशेदपुर: XLRI में मंथन: ‘जीवन कौशल’ है जरूरी, NEP के तहत चुनौतियों पर चर्चा

📌 गांडीव लाइव डेस्क:

जमशेदपुर में XLRI में ‘जीवन कौशल’ पर सेमिनार

जमशेदपुर: मंगलवार को XLRI के फादर प्रभु सभागार में एक दिवसीय सेमिनार का आयोजन हुआ, जिसमें उच्च प्राथमिक और माध्यमिक शिक्षा में ‘जीवन कौशल’ को लागू करने की चुनौतियों और संभावनाओं पर चर्चा की गई। आयोजन नैशनल इंस्टिट्यूट ऑफ एजुकेशनल प्लानिंग एंड एडमिनिस्ट्रेशन (NIEPA), नई दिल्ली द्वारा प्रायोजित और सीड्स (SEEDS) द्वारा आयोजित किया गया था। इस सेमिनार का मुख्य विषय ‘राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) के संदर्भ में जीवन कौशल को लागू करने की समस्याएं’ था।

शैक्षणिक उत्कृष्टता से अधिक महत्वपूर्ण हैं जीवन कौशल: डॉ. निधि मिश्रा

कार्यक्रम की मुख्य वक्ता, XLRI की फैकल्टी डॉ. निधि मिश्रा ने वर्तमान शिक्षा प्रणाली पर टिप्पणी की। उन्होंने बताया कि आजकल के अभिभावक और शिक्षक सिर्फ अंक और शैक्षणिक उत्कृष्टता को प्राथमिकता दे रहे हैं। डॉ. मिश्रा ने कहा कि भविष्य की चुनौतियों का सामना करने के लिए ‘जीवन कौशल’ किताबी ज्ञान से कहीं अधिक आवश्यक है। उन्होंने सुझाव दिया कि हमें बच्चों को व्यवहारिक ज्ञान के लिए तैयार करना चाहिए।

ग्रामीण शिक्षा में जागरूकता की जरूरत

कोल्हान विश्वविद्यालय की पूर्व कुलपति डॉ. शुक्ला मोहंती ने ग्रामीण शिक्षा प्रणाली पर अपने विचार प्रस्तुत किए। उन्होंने कहा कि सरकारी और ग्रामीण स्कूलों में जीवन कौशल को सही तरीके से लागू करने के लिए और प्रयास किए जाने की आवश्यकता है। ग्रामीण क्षेत्रों के बच्चों को इसके प्रति जागरूक करना अत्यंत आवश्यक है। वहीं, ‘सीड्स’ की सचिव डॉ. शुभ्रा दिवेदी ने भी जीवन कौशल को आधुनिक समय की जरूरत बताया।

“जीवन जीने का कौशल ही असली कुशलता”

सेमिनार में पीएमश्री प्लस-2 हाई स्कूल सिमुलडांगा के शिक्षक उमा नाथ सिंह ने सरलता से महत्वपूर्ण संदेश दिया। उनका कहना था कि किसी व्यक्ति के पास सही जीवन कौशल होने पर ही उसे वास्तव में कुशल माना जाएगा।

13 स्कूलों के प्रतिनिधि शामिल हुए

इस सेमिनार में शहर के प्रतिष्ठित विद्यालयों जैसे डीबीएमएस और चिन्मय विद्यालय के विद्यार्थियों, हेडमास्टरों और शिक्षकों ने भाग लिया। पंचायत प्रतिनिधियों, एसएमसी (SMC) सदस्यों और अभिभावकों ने भी अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। प्रश्नोत्तर सत्र के दौरान विशेषज्ञों ने उपस्थित लोगों के सवालों का समाधान किया। कार्यक्रम को सफल बनाने में सीड्स की महिला लीडर्स और बीईओ (BEO) की महत्वपूर्ण भूमिका रही। अंत में, कार्यक्रम के संयोजक महानंद झा ने धन्यवाद ज्ञापन दिया।

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