जामताड़ा: 5 साल की मजदूरी न मिलने पर कैंसर पीड़ित पंप ऑपरेटर की इलाज के बिना मौत

जामताड़ा में सरकारी लापरवाही से एक और जीवन का अंत

जामताड़ा जिले के फतेहपुर प्रखंड के चौकुंदा में एक गरीब व्यक्ति की जान सरकारी अधिकारियों की लापरवाही के कारण चली गई। पंप हाउस में ऑपरेटर के रूप में कार्यरत 42 वर्षीय नुनूलाल राय की इलाज के अभाव में दर्दनाक मौत हो गई। नुनूलाल पिछले 5 वर्षों से अपनी ड्यूटी faithfully निभा रहे थे, लेकिन उन्हें एक दिन की भी मजदूरी नहीं मिली थी।

भुखमरी और बीमारी का सामना

नुनूलाल की आर्थिक स्थिति पहले से ही खराब थी और वे कैंसर जैसी गंभीर बीमारी से जूझ रहे थे। 5 साल से रुका हुआ मानदेय और इलाज की भारी लागत ने उनकी समस्याओं को और बढ़ा दिया। आर्थिक तंगी के कारण, वे समय पर इलाज नहीं करवा सके और अंततः पंप हाउस में अपनी ड्यूटी के दौरान उनकी मौत हो गई। अब उनके परिवार में पत्नी और दो बच्चों के सिर से कमाने वाले सदस्य का साया उठ गया है।

ग्रामीणों का आक्रोश

नुनूलाल की मौत की सूचना फैलते ही उनके परिजनों और ग्रामीणों में गुस्सा फूट पड़ा। उन्होंने शव के साथ पंप हाउस पर धरना दिया। जब पेयजल एवं स्वच्छता विभाग के एसडीओ से संपर्क किया गया, तो उन्होंने किसी भी प्रकार की सरकारी मदद देने से मना कर दिया। अधिकारी का यह रवैया ग्रामीणों के आक्रोश को और भड़का गया।

प्रशासन की पहल और आर्थिक सहायता

स्थिति को नियंत्रित करने के लिए फतेहपुर के बीडीओ प्रेम कुमार दास, थाना प्रभारी अमर सिंह, मुखिया जियामनी हेंब्रम और प्रतिनिधि विभीषण हेंब्रम मौके पर पहुंचे। उन्होंने समझाने-बुझाने के बाद मृतक के परिवार को 75,000 रुपये की तात्कालिक आर्थिक सहायता प्रदान की। इसके साथ ही पीड़ित परिवार को अंबेडकर आवास और मैया सम्मान योजना का लाभ देने का लिखित आश्वासन दिया गया। इसके बाद ग्रामीणों ने शव हटाने पर सहमति जताई।

अन्य कर्मियों में चिंता का माहौल

यह घटना विभाग की संवेदनहीनता को उजागर करती है। वर्तमान में पंप हाउस में दो अन्य दैनिक वेतन भोगी कर्मी भी कार्यरत हैं, जिन्हें अब तक एक भी पैसे का भुगतान नहीं हुआ है। नुनूलाल की मृत्यु के बाद, यह दोनों कर्मी अब अपने भविष्य और सुरक्षा को लेकर चिंतित हैं।

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