झारखंड बजट 2025-26: पिछले वर्ष से 11% कम खर्च, केंद्र से राशि न मिलने के कारण जानें

📌 गांडीव लाइव डेस्क:

झारखंड में बजट उपयोग की गति धीमी, 2025-26 के आंकड़े चिंताजनक

झारखंड में वित्तीय वर्ष 2025-26 के दौरान विभिन्न विभागों में योजना मद के खर्च की रफ्तार का प्रदर्शन पिछले साल की तुलना में कमजोर रहा है। 31 जनवरी 2026 तक कुल बजटीय प्रावधान का मात्र 47 प्रतिशत ही खर्च किया जा सका, जबकि पिछले वर्ष इसी अवधि में 58 प्रतिशत राशि खर्च हुई थी। इस प्रकार, जनवरी महीने तक लगभग 11 प्रतिशत का कमी देखी गई है।

बजट समीक्षा के दौरान सामने आई समस्याएं

9 फरवरी को सचिव (व्यय) की अध्यक्षता में आयोजित बैठक में विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे। इस समीक्षा में यह स्पष्ट हुआ कि वित्तीय वर्ष के समाप्त होने में सिर्फ डेढ़ माह बचा है, लेकिन कई विभागों का खर्च उनके तय लक्ष्यों के अनुरूप नहीं है।

पिछले वित्तीय वर्ष 2024-25 में मार्च तक कुल 89 प्रतिशत राशि खर्च की जा चुकी थी। ऐसे में इस बार मार्च से पहले खर्च को बढ़ाना विभागों के लिए एक बड़ी चुनौती बनता जा रहा है।

केंद्रांश में देरी से योजनाओं पर प्रभाव

समस्या का एक मुख्य कारण यह है कि कई केंद्र प्रायोजित योजनाओं में केंद्रांश की राशि समय पर नहीं मिल रही है या आंशिक रूप से मिल रही है। इससे राज्यांश की राशि का उपयोग नहीं हो पा रहा है, जिससे ग्रामीण विकास, सामाजिक सुरक्षा और आधारभूत संरचना से संबंधित योजनाओं पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा है। सचिव (व्यय) ने निर्देशित किया है कि जिन योजनाओं में इस वित्तीय वर्ष में केंद्रांश मिलने की संभावना कम है, उनके लिए संबंधित राज्यांश की राशि तुरंत इधर-उधर की जाए।

तकनीकी स्वीकृतियों में बाधाएं

कुछ विभागों में तकनीकी और प्रशासनिक स्वीकृतियों में देरी चल रही है। साथ ही, क्षेत्रीय कार्यालयों से उपयोगिता प्रमाण पत्र (यूसी) समय पर न मिल पाने के कारण राशि का विमुक्ति भी प्रभावित हो रहा है। विभागों को योजनाओं की नियमित निगरानी, लंबित स्वीकृतियों को शीघ्रता से निपटाने और यूसी को समय पर प्राप्त करने के निर्देश दिए गए हैं।

कुल बजट में वृद्धि पर सवाल

झारखंड के लिए आर्थिक वर्ष 2025-26 में कुल बजट लगभग ₹1,45,400 करोड़ निर्धारित किया गया है, जो पिछले वर्ष की तुलना में लगभग 13 प्रतिशत अधिक है। हालांकि, जनवरी तक की धीमी खर्च की गति ने वित्तीय प्रबंधन के प्रति गंभीर प्रश्न उठाए हैं।

अगली रिपोर्ट में और अधिक जानकारी की प्रतीक्षा रहेगी।

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