रांची। झारखंड सरकार ने विदेश में अध्ययन कर रहे डॉक्टरों के लिए एक महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। राज्य सरकार ने इन चिकित्सकों को 2.53 करोड़ रुपये की स्टाइपेंड राशि प्रदान करने का ऐलान किया है। यह राशि राज्य के पांच प्रमुख सरकारी मेडिकल कॉलेजों में वितरित की जाएगी, जिससे सैकड़ों इंटर्न डॉक्टरों को सीधा लाभ मिलेगा।
राज्य के स्वास्थ्य मंत्री डॉ. इरफान अंसारी ने बताया कि लंबे समय से विदेश से लौटने वाले चिकित्सकों को स्टाइपेंड नहीं मिलने के कारण उनका मनोबल प्रभावित हो रहा था। कई बार छात्रों ने अपनी समस्याएं साझा की, लेकिन उनकी अनदेखी होती रही। अब, झारखंड सरकार इन डॉक्टरों को स्टाइपेंड प्रदान करेगी।
शनिवार को जारी एक प्रेस विज्ञप्ति में मंत्री ने कहा कि 1 जुलाई 2023 से इंटर्नशिप कर रहे विदेशी आयुर्विज्ञान स्नातकों के लिए कुल 2.53 करोड़ रुपये स्टाइपेंड के रूप में स्वीकृत किए गए हैं।
डॉक्टर दूर-दराज के क्षेत्रों में भी स्वास्थ्य सेवाओं को करेंगे मजबूत
मंत्री ने बताया कि स्टाइपेंड की कमी के कारण पहले डॉक्टर अन्य राज्यों में जाने को मजबूर हो जाते थे, जिससे झारखंड में विशेषज्ञों की कमी बनी रहती थी। लेकिन अब यह स्थिति बदलने जा रही है। डॉक्टर दूर-दराज के क्षेत्रों में जाकर स्वास्थ्य सेवाओं को और मजबूती प्रदान करेंगे। अब बड़ी संख्या में चिकित्सक झारखंड में अपनी सेवाएं देने के लिए तैयार होंगे।
उन्होंने कहा कि इस निर्णय से न केवल विदेशी आयुर्विज्ञान स्नातकों को उनका अधिकार प्राप्त हुआ है, बल्कि चिकित्सा समुदाय में यह संदेश गया है कि सरकार उनकी समस्याओं को समझती है और समाधान के लिए प्रतिबद्ध है। इस फैसले से डॉक्टर अधिक समर्पण के साथ मरीजों की सेवा कर सकेंगे।
राज्य के सभी सरकारी चिकित्सा महाविद्यालयों और अस्पतालों में इंटर्नशिप कर रहे विदेशी आयुर्विज्ञान स्नातकों को न केवल निःशुल्क इंटर्नशिप की सुविधा मिलेगी, बल्कि उन्हें भारतीय आयुर्विज्ञान स्नातकों के समान स्टाइपेंड भी दिया जाएगा। सरकार का उद्देश्य राज्य में स्वास्थ्य व्यवस्था को मजबूत करना और डॉक्टरों को उनका उचित सम्मान प्रदान करना है।