रांची : झारखंड उच्च न्यायालय ने एक आपराधिक अपील की सुनवाई के दौरान पुलिस द्वारा प्राथमिकी (एफआईआर) दर्ज नहीं करने के मामले पर गहरी नाराजगी व्यक्त की है। अदालत ने इस मामले को गंभीर मानते हुए धनबाद के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) को मंगलवार को व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होकर स्पष्टीकरण देने का आदेश दिया है।
यह मामला न्यायमूर्ति सुजीत नारायण और न्यायमूर्ति संजय प्रसाद की खंडपीठ में सुनवाई के लिए आया। जानकारी के अनुसार, अपीलकर्ता रवि साव को पहले ही जमानत मिल चुकी थी, जिसके बाद पीड़िता ने जमानत रद्द करने के लिए याचिका दायर की।
पुलिस पर एफआईआर दर्ज न करने का आरोप
पीड़िता का आरोप है कि जमानत पर रिहा होने के बाद अपीलकर्ता ने पुनः अवैध गतिविधियों को अंजाम दिया, जिसकी शिकायत उसने साइबर पुलिस में की थी। हालांकि, अदालत के समक्ष यह बात सामने आई कि शिकायत में संज्ञेय अपराध का स्पष्ट उल्लेख होने के बावजूद पुलिस ने एफआईआर दर्ज नहीं की।
इस पर अदालत ने सख्त रुख अपनाते हुए पूछा कि जब शिकायत में संज्ञेय अपराध का उल्लेख है, तो एफआईआर क्यों नहीं दर्ज की गई। मामले की गंभीरता को देखते हुए कोर्ट ने धनबाद एसएसपी को तलब कर जवाब मांगा है। अपीलकर्ता की ओर से अधिवक्ता शैलेश कुमार सिंह ने पक्ष रखा।