झारखंड पुलिस ने बंगाल चुनाव पर सतर्कता बढ़ाई, सीमा पर चेकिंग हुई तीव्र।

रांची: विधानसभा चुनाव के लिए झारखंड पुलिस की तैयारियां

पश्चिम बंगाल में आगामी विधानसभा चुनावों को लेकर झारखंड पुलिस ने अपनी तैयारियों को मजबूत कर लिया है। झारखंड के 10 जिले पश्चिम बंगाल की सीमा से जुड़े हुए हैं, इसलिए सुरक्षा व्यवस्था की विशेष रूप से समीक्षा की जा रही है। इन जिलों में अस्थायी चौकियों की स्थापना की जाएगी ताकि सुरक्षा की निगरानी और सख्त की जा सके।

संवेदनशील जिलों पर विशेष ध्यान

पुलिस मुख्यालय ने जिन जिलों को संवेदनशील माना है, उनमें साहिबगंज, पाकुड़, दुमका, जामताड़ा, धनबाद, बोकारो, रामगढ़, रांची, सरायकेला-खरसावां और पूर्वी सिंहभूम शामिल हैं। इन जिलों में पुलिस को अतिरिक्त सतर्क रहने के निर्देश दिए गए हैं।

त्योहारों के बाद नई योजना बनेगी

सूत्रों के अनुसार, ईद, सरहुल और रामनवमी के बाद झारखंड और पश्चिम बंगाल के सीमावर्ती जिलों के अधिकारियों के बीच एक महत्वपूर्ण बैठक होगी। इस बैठक में चुनाव की सुरक्षा व्यवस्था को और बेहतर बनाने के उपायों की चर्चा की जाएगी। इससे पहले इस विषय पर एक बैठक हो चुकी है।

अंतरराज्यीय अपराधियों पर ध्यान

चुनाव के दौरान अपराधियों की गतिविधियों पर नकेल कसने के लिए झारखंड और पश्चिम बंगाल की पुलिस सहयोग करेंगी। दोनों राज्यों की पुलिस अंतरराज्यीय अपराधियों, फरार वारंटियों, और संदिग्ध व्यक्तियों की जानकारी साझा करेगी, ताकि समय पर कार्रवाई की जा सके।

सीमा पर चौकसी, हर गतिविधि पर नजर

झारखंड और बंगाल की सीमा पर कई अस्थायी चौकियां बनाई जाएंगी। इन स्थलों पर संदिग्ध वाहनों, व्यक्तियों और गतिविधियों की गहनता से जांच की जाएगी। विशेष रूप से निम्नलिखित पर ध्यान दिया जाएगा:

  • नशीले पदार्थों की तस्करी
  • अवैध शराब की सप्लाई
  • वोट के बदले पैसे (वोट फॉर नोट)
  • काले धन का परिवहन

चुनाव आयोग के निर्देशों पर कड़ाई

पुलिस मुख्यालय ने सभी जिलों को भारत निर्वाचन आयोग के दिशा-निर्देश भेज दिए हैं। अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिया गया है कि चुनाव को प्रभावित करने वाले काले धन पर कड़ी नजर रखें। यदि कहीं बड़ी मात्रा में नकदी बरामद होती है, तो उसकी जांच के लिए आयकर विभाग से भी सहायता ली जाएगी।

शांतिपूर्ण चुनाव का उद्देश्य

झारखंड पुलिस का मुख्य लक्ष्य सीमावर्ती क्षेत्रों में शांति बनाए रखना और चुनाव प्रक्रिया को निष्पक्ष और सुरक्षित बनाना है। इसके लिए विभिन्न स्तरों पर निगरानी और समन्वय बढ़ाया जा रहा है।

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