झारखंड पुलिस सादे कागज पर हस्ताक्षर लेकर रेप मामले दर्ज कर रही है।

झारखंड की खलारी थाना क्षेत्र में एक नाबालिग लड़की से संबंधित मामले में पुलिस की कार्यशैली पर सवाल उठ रहे हैं। घटना के अनुसार, 19 मार्च 2026 को नाबालिग का न तो अपहरण हुआ और न ही उसके साथ दुष्कर्म की कोई घटना हुई। फिर भी, पुलिस ने बिना ठोस सबूत के तपेश्वर कुमार यादव के खिलाफ आरोप दर्ज किया। आरोप यह था कि पुलिस ने नाबालिग से सादे कागज पर हस्ताक्षर लेकर उसे फंसाने का प्रयास किया।

23 मार्च 2026 को खलारी थाना में दर्ज की गई एफआईआर में कहा गया था कि आरोपी ने नाबालिग को जबरदस्ती एक चार पहिया वाहन में बैठाकर अपने क्वार्टर ले जाकर दुष्कर्म किया। पुलिस ने इस मामले में भारतीय न्याय संहिता और पॉक्सो एक्ट के तहत आरोप पत्र दाखिल किया था।

मामले की सुनवाई के दौरान, नाबालिग ने अदालत में अपने बयान से पलटा लिया। उसने कहा कि उसके साथ कोई घटना नहीं हुई और वह आरोपी को पहचानती नहीं है। उसके अनुसार, पुलिस ने उसे बिना समझाए ही सादे कागज पर हस्ताक्षर कराए थे।

मामले का विकास

नाबालिग की बहनों ने भी अदालत में यह स्पष्ट किया कि उनके साथ कोई घटना नहीं हुई। हालाँकि, बड़ी बहन ने आरोपी को पहचानने की बात कही, लेकिन उसने भी यह कहा कि कोई अपराध नहीं हुआ और वे इस मामले को आगे बढ़ाना नहीं चाहतीं।

विशेष लोक अभियोजक ने अदालत में दलील दी कि पीड़िता के पहले के बयान में आरोपी पर यौन शोषण का आरोप था, इसलिए मामला पूरी तरह से झूठा नहीं हो सकता। वहीं, बचाव पक्ष ने तर्क किया कि जब खुद पीड़िता ने अदालत में घटना से इनकार किया है, तो अभियोजन पक्ष का मामला साबित नहीं हो सकता।

मामले की समयरेखा

  • 19 मार्च 2026: घटना की तिथि।
  • 23 मार्च 2026: खलारी थाना में केस दर्ज हुआ।
  • 30 अप्रैल 2026: केस में चार्जशीट दाखिल हुआ।
  • 17 जून 2026: न्यायालय में चार्जफ्रेम हुआ।
  • 02 जुलाई 2026: केस में साक्ष्यों का परीक्षण हुआ।
  • 13 जुलाई 2026: मामले का फैसला आया।

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