जामताड़ा का कदम पाड़ा गांव आज भी 90 के दशक जैसी खस्ताहाल, सरकारी योजनाएं नदारद।

जामताड़ा का कदम पाड़ा गांव: सरकारी योजनाओं की असफलता

जामताड़ा प्रखंड के गोपालपुर पंचायत का आदिवासी बहुल गांव कदम पाड़ा हालात की दृष्टि से बेहद चिंताजनक स्थिति में है। यहां की बदहाली और प्रशासन की लापरवाही से गांव की सरकार द्वारा लागू की गई कल्याणकारी योजनाएं पूरी तरह असफल हो रही हैं।

बच्चों के भविष्य की चिंता

शनिवार को जामताड़ा के सीओ सह प्रभारी बीडीओ अपनी टीम के साथ इस गांव का दौरा करने पहुंचे। ग्रामीणों को उम्मीद थी कि उनका हाल जानकर कुछ सकारात्मक परिवर्तन होगा। लेकिन इस दौरे ने स्थानीय प्रशासन की कमियों को उजागर कर दिया। करीब 20 से 25 घरों और लगभग 250 की आबादी वाले इस गांव में लोग आज भी अत्यंत कठिनाई से जीवन यापन कर रहे हैं।

गांव की स्थिति

गांव का माहौल ऐसा है कि यह 90 के दशक की याद दिलाता है। चारों ओर खपरैल और पुआल के जर्जर मकान फैले हुए हैं, जो यहां की आर्थिक और सामाजिक स्थिति को स्पष्ट करते हैं। इस गांव के निवासियों को मूलभूत सुविधाओं की भी कमी का सामना करना पड़ रहा है।

मैया सम्मान योजना का सीमित लाभ

हालांकि, सरकार की मैया सम्मान योजना का लाभ गांव की केवल 3-4 महिलाओं तक ही सीमित रह गया है। यह स्थिति बताती है कि कैसे कल्याणकारी योजनाएं वास्तविक जरूरतमंदों तक नहीं पहुँच पा रही हैं।

Leave a Comment

आपका ईमेल पता प्रकाशित नहीं किया जाएगा. आवश्यक फ़ील्ड चिह्नित हैं *

Scroll to Top