बोकारो में कायस्थ समाज की बैठक: बेरोजगारी और बेटियों के भविष्य पर हुई गंभीर चर्चा

बोकारो में कायस्थ समाज का महासम्मेलन: बेरोजगारी और बेटियों के भविष्य पर चर्चा

बोकारो | 5 अप्रैल: आज बोकारो क्लब में कायस्थ समाज के लिए एक महत्वपूर्ण महासम्मेलन आयोजित किया गया। चित्रगुप्त महापरिवार (बोकारो जिला) और लाल बहादुर शास्त्री सेवा समिति के सहयोग से यह कार्यक्रम सम्पन्न हुआ, जिसमें समाज के महत्वपूर्ण मुद्दों पर गहन विचार-विमर्श किया गया। सुबह 9 बजे से शुरू हुए इस सम्मेलन में झारखंड के सभी 24 जिलों से गणमान्य प्रतिनिधियों ने भाग लिया।

कार्यक्रम की जानकारी

मुख्य संरक्षक जयशंकर जयपुरियार बब्बू ने बताया कि आरक्षण और संख्या बल के कारण सरकारी नौकरियों में युवाओं के लिए अवसर सीमित हो गए हैं। उन्होंने सुझाव दिया कि अब कायस्थ युवाओं को आत्मनिर्भरता की दिशा में नए विकल्पों की तलाश करनी चाहिए और स्वरोजगार के क्षेत्र में अपनी क्षमताओं को साबित करना चाहिए।

बेटियों की शिक्षा और सामाजिक चुनौतियाँ

सम्मेलन में केवल आर्थिक मुद्दों पर ही नहीं, बल्कि सामाजिक चुनौतियों पर भी चर्चा की गई। विशेष रूप से:

  • आर्थिक चुनौतियाँ: आर्थिक संकट के कारण युवतियों के विवाह में आने वाली समस्याओं पर गंभीर चर्चा हुई।
  • सशक्तिकरण: बेटियों को उच्च शिक्षा दिलाने और उन्हें आत्मनिर्भर बनाने के लिए चित्रगुप्त महापरिवार द्वारा विशेष कार्यक्रमों की योजना बनाई गई।
  • बुजुर्गों का सम्मान: बदलते सामाजिक-आर्थिक माहौल में वरिष्ठ नागरिकों के जीवन स्तर और उनकी सुरक्षा को लेकर भी एक रोडमैप बनाने पर चर्चा हुई।

राजनीतिक उपेक्षा के खिलाफ एकजुटता

महासम्मेलन में वक्ताओं ने समाज की राजनीतिक उपेक्षा के खिलाफ कड़ा रुख अपनाया। उनका मानना था कि कायस्थ समुदाय ने हमेशा राष्ट्रहित में अपना योगदान दिया है, लेकिन वर्तमान राजनीति में उनकी भागीदारी सीमित रखी जा रही है। इस कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य समाज को एकजुट कर राजनीतिक चेतना को जागृत करना रहा।

उपस्थिति और आयोजन की गरिमा

यह भव्य आयोजन चित्रगुप्त महापरिवार के संरक्षक जयशंकर जयपुरियार और कार्यक्रम के सलाहकार डॉ. प्रणव कुमार बब्बू के कुशल नेतृत्व में सम्पन्न हुआ। रांची, धनबाद, रामगढ़, हजारीबाग, चतरा और राज्य के अन्य हिस्सों से आए कायस्थ रत्नों ने इस कार्यक्रम में अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। यह सम्मेलन इस बात का प्रतीक बन गया है कि कायस्थ समाज अब अपनी समस्याओं के समाधान के लिए सजग और संगठित होकर एक नई दिशा में आगे बढ़ने को तैयार है।

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