केसी त्यागी की जेडीयू से विदाई, पार्टी ने कहा- अब कोई संबंध नहीं

जेडीयू में के.सी. त्यागी का अध्याय समाप्त

नई दिल्ली. जेडीयू (जदयू) के सूत्रों के अनुसार, वरिष्ठ नेता के.सी. त्यागी का पार्टी में योगदान अब समाप्त हो चुका है। हाल ही में उनके बयानों और गतिविधियों पर उठे सवालों के मद्देनजर, पार्टी नेतृत्व ने उनसे दूरी बनाने का निर्णय लिया। जेडीयू प्रवक्ता राजीव रंजन ने स्पष्ट किया है कि अब के.सी. त्यागी का पार्टी के साथ कोई औपचारिक संबंध नहीं रहा है।

नीतीश कुमार को भारत रत्न देने की मांग

के.सी. त्यागी ने हाल ही में बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को भारत रत्न देने की मांग की थी। उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी को पत्र लिखकर इस संबंध में अपने विचार प्रस्तुत किए थे। पत्र में, त्यागी ने कहा था कि जैसे चौधरी चरण सिंह और कर्पूरी ठाकुर को यह उपाधि दी गई थी, नीतीश कुमार भी इसके हकदार हैं। परंतु, जेडीयू ने इस मांग से दूर रहने का फैसला लिया। प्रवक्ता राजीव रंजन ने कहा कि त्यागी का यह बयान पार्टी के आधिकारिक स्टैंड से अलग है और इसे उनकी व्यक्तिगत राय के रूप में देखा जाना चाहिए।

सम्मानजनक अलगाव की ओर कदम

सूत्रों के अनुसार, दोनों पक्षों के बीच सम्मानजनक अलगाव हो चुका है, हालांकि पार्टी ने त्यागी के खिलाफ कोई औपचारिक अनुशासनात्मक कार्रवाई नहीं की है। यह कदम उनके लंबे समय के संबंध को देखते हुए लिया गया है। पार्टी के अंदरूनी हलकों में इसे एक युग का अंत माना जा रहा है, जबकि जेडीयू नेतृत्व अपनी रणनीति और संगठनात्मक मजबूती पर ध्यान केंद्रित कर रहा है।

मुस्तफिजुर रहमान पर विवादास्पद बयान

के.सी. त्यागी ने हाल ही में क्रिकेट खिलाड़ी मुस्तफिजुर रहमान के समर्थन में बयान दिया था, जो जेडीयू नेतृत्व को अनुचित लगा। उन्होंने कहा था कि खेल में राजनीति नहीं लानी चाहिए और भारत को भी उन्हें खेलने की अनुमति देनी चाहिए। लेकिन बांग्लादेश में हिंदुओं पर हो रहे अत्याचार के बाद इस बयान का विरोध हुआ। पार्टी के अनुसार, त्यागी को ऐसे बयानों का समर्थन नहीं करना चाहिए था।

जेडीयू की नीति पर असहमति

जेडीयू नेतृत्व का मानना है कि जब मामला दो देशों के बीच का हो, तो त्यागी को पार्टी के साथ चर्चा करनी चाहिए थी। पहले भी वे कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर पार्टी की नीति से अलग बयान दे चुके हैं, जिससे पार्टी को मुश्किल स्थिति का सामना करना पड़ा। अंततः, उनकी इस स्थिति के कारण उन्हें जेडीयू के राष्ट्रीय प्रवक्ता पद से इस्तीफा देना पड़ा।

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