📌 गांडीव लाइव डेस्क:
रांची के धुर्वा में जगन्नाथ मैदान पर रविवार को कुड़मी समाज की एक विशाल महारैली का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में वृहद झारखंड कुड़मी समन्वय समिति के नेतृत्त्व में राज्य के विभिन्न जिलों से हजारों लोग पहुंचे। सुबह से ही मैदान में लोगों की भीड़ उमड़ने लगी। पारंपरिक परिधान में महिलाएं, युवा और बुजुर्ग सभी ने उत्साह के साथ भाग लिया। इस रैली की अध्यक्षता समिति के प्रमुख संयोजक शीतल ओहदार ने की, जबकि संचालन का कार्य राजेंद्र महतो और सखीचंद महतो ने संभाला।
सामाजिक अधिकारों की मांगे
रैली के दौरान कुड़मी समाज की प्रमुख मांग थी कि उन्हें अनुसूचित जनजाति (एसटी) की सूची में शामिल किया जाए। इसके साथ ही कुड़माली भाषा को संविधान की आठवीं अनुसूची में सम्मिलित करने की मांग भी जोरदार ढंग से उठाई गई। वक्ताओं ने कहा कि यह मांग नई नहीं है, बल्कि समाज लंबे समय से इसके लिए संघर्ष कर रहा है। मुख्य संयोजक शीतल ओहदार ने बताया कि कुड़मी समाज पिछले 75 सालों से अपने अधिकारों के लिए लड़ाई लड़ रहा है।
ऐतिहासिक पहलू
ओहदार ने कहा कि अंग्रेजों के समय की जनगणना में कुड़मियों को जनजातीय श्रेणी में रखा गया था, लेकिन आजादी के बाद उन्हें उस सूची से हटा दिया गया। उन्होंने उल्लेख किया कि जो क्षेत्र खनिज संपदा से समृद्ध हैं, वहां रहने वाले लोगों को उनके अधिकारों से वंचित रखा गया है।
आर्थिक नाकेबंदी की चेतावनी
पूर्व विधायक डॉ. लंबोदर महतो ने स्पष्ट रूप से कहा कि अगर सरकार ने त्वरित कार्रवाई नहीं की, तो पूरे झारखंड में अनिश्चितकालीन आर्थिक नाकेबंदी की जाएगी। उनका कहना था कि समाज अब और इंतजार नहीं करेगा।
जनगणना में पहचान
शिक्षाविद डॉ. अमर कुमार चौधरी ने लोगों से अनुरोध किया कि वे आगामी जनगणना में अपनी जाति ‘कुड़मी’ और भाषा ‘कुड़माली’ ही दर्ज कराएं। उनका कहना था कि सही पहचान दर्ज होना अत्यंत आवश्यक है ताकि समाज की शक्ति सामने आ सके।
शिक्षा और राजनीति में सुधार
भाजपा विधायक नागेंद्र महतो ने कहा कि शिक्षा और राजनीतिक भागीदारी की कमी के चलते समाज पिछड़ गया है। उन्होंने युवाओं से पढ़ाई पर ध्यान केंद्रित करने और संगठित होकर आगे बढ़ने का आह्वान किया। झारखंड लोकतांत्रिक क्रांतिकारी मोर्चा के नेता देवेंद्र नाथ महतो ने इस बात पर जोर दिया कि राज्य बनने के बाद भी कुड़मी समाज को आरक्षण का पूरा लाभ नहीं मिला है, जिससे बेरोजगारी बढ़ी है।
महिलाओं की भागीदारी
समाज की महिला अध्यक्ष सुषमा महतो ने कहा कि बाईसी प्रथा आज भी समाज की पहचान है। उन्होंने कुड़मियों को एसटी सूची में शामिल करने की आवश्यकता पर बल दिया ताकि पेसा कानून को सही तरीके से लागू किया जा सके।
महत्वपूर्ण प्रस्ताव
इस महारैली में कई महत्वपूर्ण प्रस्ताव पारित किए गए, जिनमें जनगणना में कुड़मी जाति और कुड़माली भाषा को शामिल करना, बच्चों को उच्च शिक्षा के लिए प्रेरित करना और युवाओं को आधुनिक खेती एवं स्वरोजगार से जोड़ने का संकल्प लिया गया।
कार्यक्रम में रणधीर चौधरी, संजय लाल महतो, थानेश्वर महतो, रामचंद्र महतो, कपिल देव महतो और पार्वती देवी सहित कई उपस्थित थे। हजारों की संख्या में महिलाओं और पुरुषों की भागीदारी ने दिखा दिया कि समाज अपने अधिकारों के लिए अब खुलकर आवाज उठा रहा है।