📌 गांडीव लाइव डेस्क:
झारखंड में मानव-हाथी संघर्ष की समस्या पर विधानसभा में चर्चा
रांची: झारखंड विधानसभा में मंगलवार को मानव और हाथी के बीच बढ़ते संघर्ष का मुद्दा गरमाया। सिमडेगा विधायक भूषण बाड़ा ने तारांकित प्रश्न के माध्यम से सरकार से जानकारी मांगी कि कई जिलों में हाथी-मानव संघर्ष की घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं।
संघर्ष की गंभीरता
सरकार ने स्वीकार किया कि यह समस्या गंभीर रूप ले रही है। 2019 से 2026 के बीच जंगली हाथियों के हमलों में 474 से अधिक लोगों की जान जा चुकी है, जो चिंताजनक है। विधायक भूषण बाड़ा ने बताया कि रामगढ़, पश्चिम सिंहभूम, पूर्वी सिंहभूम, पलामू, लातेहार, सिमडेगा, गुमला और खूंटी जैसे जिलों में हाथी नियमित रूप से गांवों में घुसकर फसलों को नुकसान पहुंचा रहे हैं और रात में बस्तियों में प्रवेश कर रहे हैं, जिससे ग्रामीणों में भय उत्पन्न हो रहा है।
हाथियों के प्राकृतिक गलियारे प्रभावित
जंगलों की कटाई, खनन कार्य, शहरीकरण, कृषि विस्तार, राष्ट्रीय राजमार्गों का चौड़ीकरण, और रेलवे लाइनों का विस्तार हाथियों के प्राकृतिक गलियारों को प्रभावित कर रहा है। भोजन और पानी की खोज में हाथी अब मानव बस्तियों की ओर बढ़ रहे हैं, जिससे संघर्ष की घटनाएं बढ़ रही हैं।
सरकार के कदम
झारखंड में वर्तमान में लगभग 600 हाथियों की मौजूदगी है। इस समस्या से निपटने के लिए वन विभाग कई उपाय कर रहा है, जिनमें शामिल हैं:
- संवेदनशील क्षेत्रों में त्वरित प्रतिक्रिया दल (QRT) की तैनाती।
- कई गांवों में चौकियों का निर्माण।
- ग्रामीणों को टॉर्च और अन्य सामग्री का वितरण।
- एफएम रेडियो और व्हाट्सएप ग्रुप के द्वारा सूचना साझा करना।
- “हमर हाथी” ऐप के माध्यम से हाथियों की गतिविधियों की रीयल-टाइम जानकारी उपलब्ध कराना।
भविष्य की योजनाएं
सरकार ने कर्नाटक से प्रशिक्षित कुमकी हाथियों को लाने का निर्णय लिया है, जो जंगली हाथियों के समूह को नियंत्रित करने में सहायक होंगे। इसके अलावा, थर्मल ड्रोन, नाइट विजन बाइनाकुलर, रेडियो कॉलर, और एआई आधारित अलर्ट सिस्टम जैसे आधुनिक तकनीकों के उपयोग की भी योजना बनाई जा रही है।
मुख्यमंत्री स्तर पर इस मुद्दे पर उच्चस्तरीय बैठकें आयोजित की गई हैं और वन विभाग को स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि हाथियों के हमलों से लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए त्वरित और प्रभावी कदम उठाए जाएं। यह समस्या न केवल मानव जीवन को खतरे में डाल रही है, बल्कि हाथियों के संरक्षण के लिए भी एक चुनौती पेश कर रही है। विशेषज्ञों के अनुसार, दीर्घकालिक समाधान के लिए कॉरिडोर की बहाली, बेहतर वन प्रबंधन, और सामुदायिक भागीदारी आवश्यक है।