झारखंड में भीषण गर्मी का दौर शुरू, नौतपा का आगाज़
रांची: झारखंड में भीषण गर्मी का मौसम आधिकारिक रूप से प्रारंभ हो चुका है। ज्योतिषीय मान्यता के अनुसार, 25 मई 2026 से ‘नौतपा’ का आरंभ होता है, जो 2 जून तक जारी रहेगा। इस अवधि में सूर्य रोहिणी नक्षत्र में स्थित रहते हैं, जिसके कारण धरती पर गर्मी का असर अधिकतम होता है। भारतीय मौसम विभाग (IMD) ने झारखंड समेत कई राज्यों में लू और हीटवेव को लेकर चेतावनी जारी की है।
झारखंड का तापमान: 45 डिग्री तक पहुँचने की संभावना
मौसम विभाग के अनुसार, अगले 9 दिनों में झारखंड में अत्यधिक गर्मी का सामना करना पड़ सकता है।
तापमान का पूर्वानुमान: राज्य की राजधानी रांची में तापमान 38-41°C के बीच रहने की संभावना है, जबकि पलामू, गढ़वा, चतरा, चाईबासा और जमशेदपुर जैसे क्षेत्रों में यह 42-45°C तक पहुँच सकता है।
हीटवेव का खतरा: उत्तर-पश्चिम झारखंड के कई जिलों में लू की स्थिति बनी हुई है। IMD ने इन क्षेत्रों के निवासियों को विशेष सतर्कता बरतने की सलाह दी है।
बारिश की संभावनाएँ: वर्तमान में मानसून से पहले बारिश की संभावनाएँ अत्यधिक कम हैं। हालांकि, कहीं-कहीं हल्की बौछारें या आंधी आ सकती हैं, लेकिन इससे गर्मी में कोई विशेष राहत मिलने की उम्मीद नहीं है।
उत्तर और मध्य भारत पर भी नौतपा का प्रभाव
झारखंड के अलावा, दिल्ली, उत्तर प्रदेश, राजस्थान, मध्य प्रदेश और हरियाणा में भी नौतपा का प्रभाव देखने को मिलेगा। इन राज्यों में तापमान 45-48°C तक पहुँच सकता है, जिससे जनजीवन पर नकारात्मक असर पड़ने की संभावना है।
गर्मी से बचने के उपाय
स्वास्थ्य विशेषज्ञों और प्रशासन ने जनता से निम्नलिखित सावधानियाँ बरतने की अपील की है:
1. समय का ध्यान रखें: दोपहर 12 बजे से शाम 4 बजे तक अनावश्यक रूप से बाहर न निकलें।
2. हाइड्रेटेड रहें: पर्याप्त मात्रा में पानी पिएं। ओआरएस, नींबू पानी और लस्सी का सेवन करें।
3. खान-पान: हल्का और सुपाच्य भोजन करें। खुले खाद्य पदार्थों से बचें।
4. पहनावा: बाहर जाते समय हल्के रंग के, ढीले सूती कपड़े पहनें और सिर को ढंककर रखें।
5. विशेष ख्याल: बुजुर्गों, बच्चों, गर्भवती महिलाओं और बीमार व्यक्तियों को सीधी धूप से बचाएं। पालतू जानवरों और पशु-पक्षियों के लिए पानी का इंतजाम करें।
क्या नौतपा अच्छी बारिश का संकेत है?
लोक मान्यताओं के अनुसार, नौतपा के दौरान जितनी अधिक गर्मी होती है, मानसून उतना ही अच्छा होने की संभावना रहती है। इस वर्ष की भीषण गर्मी को किसान अच्छी बारिश के संकेत के रूप में देख रहे हैं।