धनबाद में JMM स्थापना दिवस पर हेमंत सोरेन ने आउटसोर्सिंग कंपनियों को चेताया, स्थानीय युवाओं को मिलेगा नौकरी का अवसर

धनबाद: झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) के 54वें स्थापना दिवस पर मुख्यमंत्री एवं पार्टी के नेता हेमंत सोरेन ने धनबाद में एक महत्वपूर्ण संबोधन दिया। उन्होंने कहा कि यह भूमि केवल एक मैदान नहीं है, बल्कि यह वह स्थल है जहां झारखंड आंदोलन की दिशा तय हुई और जल, जंगल, जमीन तथा आदिवासी-मूलवासी अधिकारों की ऐतिहासिक घोषणाएं हुईं।

हेमंत सोरेन ने बताया कि इसी धरती से झारखंड को अलग राज्य बनाए जाने का ऐलान हुआ था। यहां कई मार्गदर्शक नेताओं ने जनता को प्रेरणा दी, जो अब हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन उनका संघर्ष आज भी हमें प्रेरित करता है।

दिशोम गुरु शिबू सोरेन को श्रद्धांजलि, राज्य संवारने का संकल्प

मुख्यमंत्री ने शिबू सोरेन (दिशोम गुरु) को याद करते हुए कहा कि उनकी पहचान केवल झारखंड में ही नहीं, बल्कि देश व दुनिया में भी है।

“आज उन्हें श्रद्धांजलि देते हुए उनके दिखाए रास्ते पर चलने और झारखंड को संवारने का संकल्प लेने का दिन है।”

‘जोहार’ अब झारखंड तक सीमित नहीं: हेमंत सोरेन

हेमंत सोरेन ने बताया कि आज ‘जोहार’ शब्द केवल झारखंड तक ही सीमित नहीं रह गया है।

“देश के विभिन्न हिस्सों और विदेशों में भी लोग ‘जोहार’ कहकर सम्मान व्यक्त करते हैं, यह हमारी संस्कृति की शक्ति है।”

नगर निकाय चुनाव के बीच भी संघर्ष की प्रतिबद्धता

नगर निकाय चुनाव की घोषणा के संदर्भ में मुख्यमंत्री ने कहा कि कार्यक्रम सीमित समय के लिए है, लेकिन झारखंड मुक्ति मोर्चा के संघर्ष पर इसका कोई असर नहीं पड़ेगा।

“चाहे दिन हो या रात, धूप हो या बारिश, गर्मी हो या सर्दी, पार्टी हर मौसम में अपने कार्यकर्ताओं के साथ खड़ी रहेगी।”

धनबाद, कोयला और 75% स्थानीय रोजगार का मुद्दा

कोयला नगरी धनबाद का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि सार्वजनिक कंपनियों में आउटसोर्सिंग के जरिए बाहरी मजदूरों को काम दिया जा रहा है।

उन्होंने चेतावनी दी—
“75 प्रतिशत स्थानीय नियोजन हर हाल में लागू किया जाएगा, नहीं तो स्थानीय लोग अपने अधिकारों के लिए संघर्ष करेंगे।”

झारखंड विरोधी ताकतों से सतर्क रहने की अपील

हेमंत सोरेन ने कहा कि झारखंड को बड़ी मेहनत और बलिदान से हासिल किया गया है, इसलिए झारखंड-विरोधी ताकतों को दोबारा खड़ा होने का मौका नहीं दिया जाएगा।

उन्होंने गांव और शहर की एकता पर जोर देते हुए कहा, “गांव भी हमारा है, शहर भी हमारा है—हमें एक ताकत बनकर खड़ा होना होगा।”

केंद्र सरकार पर सौतेले व्यवहार का आरोप

मुख्यमंत्री ने केंद्र सरकार पर झारखंड के प्रति सौतेला व्यवहार करने का आरोप लगाते हुए कहा कि जिस तरह झारखंड आंदोलन लड़ा गया, उसी तरह अब राजनीतिक और कानूनी दोनों स्तर पर अधिकारों की लड़ाई भी लड़ी जाएगी।

संसाधन देने वाला झारखंड, फिर भी पिछड़ा क्यों?

हेमंत सोरेन ने कहा कि झारखंड ने देश को कोयला और खनिज जैसे संसाधन दिए हैं, लेकिन बदले में राज्य को गरीबी, अशिक्षा और शोषण का सामना करना पड़ा।

इसी अन्याय के खिलाफ दिशोम गुरु शिबू सोरेन ने अलग राज्य का आंदोलन शुरू किया, जिसमें अनगिनत बलिदान हुए।

‘अबुआ सरकार’ का संकल्प: हर घर तक पहुंच

मुख्यमंत्री ने कहा कि अब ‘अबुआ सरकार’ है और लक्ष्य है—

हर व्यक्ति तक पहुंचना,

हर घर को मजबूत करना,

और आदिवासी-दलित-किसान-मजदूर के बच्चों को आगे बढ़ने का अवसर देना।

वीर भूमि झारखंड: संघर्ष ही पहचान

धनबाद को क्रांतिकारी धरती बताते हुए उन्होंने कहा कि झारखंड वीरों की भूमि है।

भगवान बिरसा मुंडा, सिद्धो कान्हू, तिलका मांझी, बिनोद बिहारी महतो से लेकर दिशोम गुरु तक का संघर्ष और बलिदान ही आज झारखंड को विशिष्ट पहचान प्रदान करता है।

“यही संघर्ष हमें गर्व से खुद को झारखंडी कहने की ताकत देता है,”—हेमंत सोरेन।

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