पंडित रघुनाथ मुर्मू जयंती पर चम्पाई सोरेन ने कहा – आदिवासी पहचान भाषा, संस्कृति और परंपरा में है।

सरायकेला खरसावां में ओलचिकी लिपि का महत्व

सरायकेला खरसावां में प्राथमिक स्तर से ओलचिकी लिपि में शिक्षा देने की पहल से इस भाषा के साहित्य को समृद्ध करने में सहायता मिलेगी। यह कदम आदिवासी समाज की पहचान को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रयास माना जा रहा है।

आदिवासी संस्कृति और पहचान

पूर्व मुख्यमंत्री ने अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि आदिवासी समाज की पहचान उनकी माटी, भाषा, संस्कृति एवं परंपराओं से जुड़ी हुई है। इस संदर्भ में, उन्होंने उल्लेख किया कि आज के समय में जब बाहरी ताकतें जैसे बांग्लादेशी घुसपैठिए समाज की मूलभूत संरचना पर हमला कर रहे हैं, तब अपनी सांस्कृतिक जड़ों को बनाए रखना अनिवार्य हो गया है।

संरक्षण और संवर्धन की आवश्यकता

पूर्व मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि भाषा, संस्कृति और परंपराओं का संरक्षण एवं संवर्धन ही आदिवासी समुदाय के अस्तित्व को सुरक्षित रखने का एकमात्र उपाय है। इसके लिए आवश्यक है कि समाज के सभी वर्ग एकजुट होकर अपनी सांस्कृतिक धरोहर को सहेजें और आगे बढ़ाएं।

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