सरायकेला में रक्षाबंधन पर महिलाओं ने पेड़ों को राखी बांधकर पर्यावरण की रक्षा का लिया संकल्प

सरायकेला-खरसावां में जंगलों के संरक्षण की अपील

सरायकेला-खरसावां क्षेत्र के ग्रामीणों ने अपनी बात रखते हुए जंगलों के महत्व को उजागर किया है। उनका कहना है कि जंगल केवल पेड़ और पौधों का समूह नहीं है, बल्कि यह उनके जीवन और आजीविका का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। ग्रामीणों ने जोर देकर कहा कि यदि जंगल सुरक्षित रहेगा, तो पर्यावरण और वन्यजीव भी सुरक्षित रहेंगे।

वन्यजीवों का प्राकृतिक आश्रय स्थल

गुंडाबिहार का यह जंगल कई वन्यजीवों के लिए एक प्राकृतिक आश्रय स्थल है, जिसमें राष्ट्रीय पक्षी मोर, लोमड़ी और हाथियों की उपस्थिति देखी जाती है। यहां सैकड़ों साल पुराने विशाल पेड़ भी हैं, जो इस क्षेत्र की जैव विविधता को बनाए रखने में मदद करते हैं। ग्रामीणों का मानना है कि इस तरह के जंगलों की रक्षा करना आवश्यक है ताकि आने वाली पीढ़ियों को इसका लाभ मिल सके।

पर्यावरण संरक्षण की जिम्मेदारी

ग्रामीणों ने अपील की है कि पर्यावरण संरक्षण को केवल एक अभियान तक सीमित नहीं रखना चाहिए। उन्होंने सभी से अनुरोध किया कि हर व्यक्ति को पेड़-पौधों की रक्षा की जिम्मेदारी निभानी चाहिए। महिलाओं ने इस संदर्भ में कहा कि जैसे रक्षाबंधन पर भाई-बहन के रिश्ते की सुरक्षा का संकल्प लिया जाता है, उसी तरह पेड़ों को भी अपना भाई मानकर उनकी सुरक्षा का संकल्प लेना आवश्यक है।

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