संदीपा विर्क की दर्दनाक कहानी: चार महीने तिहाड़ में बिताए, रिश्ते हुए बदल

संदीपा विर्क का कठिन समय: जेल में बिताए दिन और मानसिक संघर्ष

नई दिल्ली: प्रसिद्ध एक्ट्रेस और इन्फ्लुएंसर संदीपा विर्क ने हाल ही में अपने जीवन के बेहद कठिन पल साझा किए। अगस्त 2025 में, उन पर लगे मनी लॉन्ड्रिंग के आरोप में Enforcement Directorate द्वारा गिरफ्तारी की गई। उनके खिलाफ लगभग 6 करोड़ रुपये का आरोप था, जिसके कारण उन्हें तिहाड़ जेल में चार महीने से अधिक समय बिताना पड़ा।

जेल के कठिन अनुभव

संदीपा ने बताया कि जेल में हर एक दिन उनके लिए अत्यंत चुनौतीपूर्ण था। भावुक होकर उन्होंने कहा, “वहां मैंने मौत की प्रार्थना की। मुझे बार-बार लगता था कि मैंने यह नहीं किया। जब मैं पहली बार वॉशरूम गई, तो वहां के माहौल को देखकर चकित रह गई।” जेल में मानसिक और शारीरिक सबसे कठिनाइयों का सामना करने के कारण वह खुद को कमजोर महसूस करने लगीं।

परिवार का प्यार और समर्थन

संदीपा ने अपने परिवार की बात करते हुए कहा कि जब उनके माता-पिता उन्हें देखने आए, तो वह बेहद उदास हो गईं। उन्होंने साझा किया, “मैं प्रार्थना करती थी कि मौत आ जाए और मुझे अपने साथ ले जाए। यह सबसे बुरा अनुभव था, जब आपके अपने आपसे मिलने के लिए जेल आते हैं।” वे यह भी बताती हैं कि जेल के कुछ महिला अधिकारी उनके प्रति दयालु थे, जबकि अन्य कैदियों पर अपना गुस्सा उतारते थे।

व्यक्तिगत और पेशेवर रिश्तों पर असर

जेल में बिताए समय का प्रभाव उनके करियर और व्यक्तिगत रिश्तों पर भी पड़ा। संदीपा ने कहा कि कई लोगों ने उनसे नाता तोड़ लिया। “कुछ प्रोड्यूसर कहते थे- मैं तुम्हें यह बना सकता हूं। मैं हमेशा यही जवाब देती थी कि जिसने तुम्हें बनाया, वही मुझे भी बनाएगा।”

निदान और जमानत

संदीपा ने स्पष्ट किया कि वह इस मामले में निर्दोष हैं और यह उनके नियंत्रण से बाहर की गतिविधियों से संबंधित था। अदालत ने उन्हें 27 दिसंबर 2025 को जमानत दी। इस केस के मुख्य आरोपी अमित गुप्ता अभी भी फरार हैं।

मामले का सारांश

एक रिपोर्ट के अनुसार, शिकायतकर्ता को एक फिल्म में मुख्य भूमिका दिलाने का वादा किया गया था और 6 करोड़ रुपये का निवेश करने के लिए कहा गया था। यह राशि उनके खाते के माध्यम से भेजी गई थी और यह मामला 2008 से 2013 के लेन-देन से संबंधित है।

संदीपा का यह अनुभव दर्शाता है कि बड़े सार्वजनिक मुद्दों में मनुष्य कितनी अकेलापन महसूस कर सकता है और ऐसे समय में मानसिक रूप से मजबूत बने रहना कितना कठिन होता है।

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