पलामू: 10 साल बाद कोयल नदी में बाढ़, प्रशासन ने जारी किया हाई अलर्ट

कोयल नदी में बाढ़ की स्थिति, पलामू में हाई अलर्ट

पलामू जिले के ऊपरी क्षेत्रों में हुई भारी बारिश के बाद शुक्रवार सुबह कोयल नदी का जलस्तर अचानक बढ़ गया। पिछले दस वर्षों में पहली बार नदी इस प्रकार उफान पर है, जिससे जलस्तर खतरे के निशान के करीब पहुंच गया है। नदी का पानी मेदिनीनगर के अनेक निचले क्षेत्रों में घुसने के कारण स्थानीय लोगों की समस्याएं बढ़ गई हैं। जिला प्रशासन ने इस स्थिति को देखते हुए निचले इलाकों में हाई अलर्ट जारी किया है और लोगों से नदी के पास न जाने की अपील की है।

निचले क्षेत्रों में जलभराव

कोयल नदी का पानी मेदिनीनगर के कांदु मोहल्ला, गिरवर स्कूल रोड, शिवाला घाट, मुस्लिम नगर और पहाड़ी मोहल्ला जैसे निचले इलाकों में घुस आया है। कई घरों और सड़कों पर जलभराव हो गया है, जबकि कोयल रिवर फ्रंट का पूरा क्षेत्र भी जलमग्न हो चुका है। नदी किनारे स्थित सीढ़ियां भी पानी में डूब गई हैं।

जलस्तर में अचानक वृद्धि

जानकारी के अनुसार, शुक्रवार सुबह लगभग 3 बजे तक कोयल नदी का जलस्तर सामान्य था। इसके बाद, 3:30 से 4 बजे के बीच जलस्तर में अचानक तेजी से वृद्धि हुई। इस दौरान नदी का पानी तेजी से आसपास के निचले इलाकों में फैल गया, जिससे कई स्थानों पर बाढ़ जैसी स्थिति उत्पन्न हो गई।

प्रशासन का अलर्ट

बाढ़ की गंभीरता को देखते हुए जिला प्रशासन ने लोगों से नदी के किनारे जाने से मना किया है। पुलिस द्वारा माइकिंग कर स्थानीय निवासियों को नदी से दूर रहने की सलाह दी जा रही है। नदी किनारे गोताखोरों और मजिस्ट्रेट की टीमें तैनात की गई हैं, और निचले क्षेत्रों में हाई अलर्ट जारी कर दिया गया है।

ऊपरी जिलों में बारिश का प्रभाव

कोयल नदी, जो पलामू की जीवनरेखा मानी जाती है, लगभग एक दशक बाद इस तरह उफान पर आई है। बताया जा रहा है कि लातेहार, गुमला और लोहरदगा जैसे ऊपरी जिलों में लगातार हो रही बारिश के कारण नदी का जलस्तर अचानक बढ़ा है।

बाढ़ की सूचना पर लोगों की भीड़

इस बरसात के मौसम में शुरूआत में बारिश कम होने के कारण लोगों को अचानक बाढ़ की स्थिति का सामना करने की उम्मीद नहीं थी। ऐसे में कई क्षेत्रों के निवासियों को संभलने का पर्याप्त समय नहीं मिल पाया। बाढ़ की सूचना मिलते ही बड़ी संख्या में लोग कोयल नदी के किनारे पहुंचने लगे। प्रशासन लगातार निवासियों से अपील कर रहा है कि वे नदी के बढ़ते जलस्तर को देखते हुए अपनी सुरक्षा के लिए नदी किनारे जाने से परहेज करें।

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