‘बैंडिट क्वीन’: विवादों के बीच एक ऐतिहासिक फिल्म
नई दिल्ली। बॉलीवुड की दुनिया में कई ऐसी फिल्में हैं, जो विवादों के बावजूद सफल होती हैं। उनकी लिस्ट में ‘बैंडिट क्वीन’ का नाम प्रमुखता से लिया जाता है, जो फूलन देवी के जीवन पर आधारित है। इस फिल्म ने न केवल बॉक्स ऑफिस पर धूम मचाई, बल्कि आलोचकों और दर्शकों दोनों का ध्यान आकर्षित किया।
रिलीज के समय बवाल
‘बैंडिट क्वीन’ पहली बार सितंबर 1994 में प्रदर्शित हुई, लेकिन इसे बहुत जल्दी बैन कर दिया गया। फिल्म में दिखाए गए हिंसक एवं न्यूड दृश्यों और फूलन देवी के जीवन को दर्शाने के audacious तरीके ने सेंसर बोर्ड के साथ-साथ खुद फूलन देवी को भी नाराज कर दिया। reports के अनुसार, फूलन ने कहा कि फिल्म उनके व्यक्तिगत जीवन का उल्लंघन करती है और यदि इसे रिलीज किया गया तो वह आत्महत्या की धमकी तक दे सकती थीं।
फिर से रिलीज़ और कट
साल 1996 में फिल्म को फिर से A सर्टिफिकेट के साथ रिलीज़ किया गया, हालांकि इस बार कुछ दृश्यों में कट लगाया गया, जिसमें 17 मिनट का एक रेप दृश्य भी शामिल था। टीवी पर प्रसारित करने के लिए फिल्म को U/A सर्टिफिकेट दिया गया।
अवॉर्ड्स का सफर
इन सभी विवादों के बावजूद, ‘बैंडिट क्वीन’ ने दो नेशनल अवॉर्ड भी जीते। सीमा बिस्वास को बेस्ट एक्ट्रेस का अवार्ड मिला, जबकि प्रोड्यूसर बॉबी बेदी और डायरेक्टर शेखर कपूर को बेस्ट फीचर फिल्म का अवॉर्ड मिला।
महिलाओं के लिए खास शो
सूचना के अनुसार, मुंबई के चंदन सिनेमा ने इस फिल्म के विशेष शो आयोजित किए, विशेष रूप से महिलाओं के लिए, क्योंकि फिल्म की बोल्डनेस के चलते कई महिलाएं पुरुषों के साथ देखने में संकोच कर रही थीं।
फूलन देवी के साथ मुलाकात
फिल्म की कॉस्ट्यूम डिज़ाइनर और एक्ट्रेस डॉली आहलुवालिया ने जेल जाकर फूलन देवी से उनके कपड़ों और शोषण के अनुभवों पर बात की। इस दौरान फूलन ने डॉली को अपने शरीर के घाव भी दिखाए। डॉली को उनकी कहानी सुनकर आँसू आ गए, जिस पर फूलन ने कहा, “मैंने आपको केवल आधा हिस्सा बताया है।”
क्यों है ‘बैंडिट क्वीन’ आज भी महत्वपूर्ण
‘बैंडिट क्वीन’ केवल एक बायोपिक नहीं है, बल्कि यह संघर्ष और साहस की कहानी है। इस फिल्म ने विवादों और सेंसरशिप के बावजूद अपने कथानक और अभिनेता के प्रदर्शन के चलते बॉलीवुड में क्लासिक का दर्जा प्राप्त किया। यह आज भी दर्शकों के लिए प्रेरणा और सच्चाई का उदाहरण बनी हुई है।