झारखंड में पेट्रोल-डीजल पर नए प्रतिबंधों पर कांग्रेस का तीखा प्रहार
रांची: झारखंड प्रदेश कांग्रेस कमेटी के महासचिव आलोक कुमार दूबे ने केंद्र सरकार द्वारा पेट्रोल-डीजल की बिक्री पर लगाए गए नए प्रतिबंधों पर कड़ी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने इसे केंद्र की नीतिगत और प्रशासनिक विफलता का स्पष्ट उदाहरण बताया है। दूबे का कहना है कि यदि देश की ईंधन आपूर्ति प्रणाली मजबूत और पारदर्शी होती, तो सरकार को इस तरह के आपातकालीन प्रतिबंध लगाने की आवश्यकता नहीं पड़ती।
मोदी सरकार पर उठे सवाल
कांग्रेस नेता ने केंद्र सरकार की नीतियों पर सवाल उठाते हुए कहा कि भाजपा सरकार ने 12 वर्षों तक सत्ता में रहने के बाद भी ईंधन आपूर्ति को सुरक्षित और प्रभावी नहीं बनाया है। उन्होंने कहा कि मोदी सरकार लोगों को भरोसा देने और राहत पहुंचाने के बजाय देश में भय का माहौल उत्पन्न कर रही है। जबकि भाजपा देश को ऊर्जा क्षेत्र में आत्मनिर्भर बताती है, वहीं दूसरी ओर पेट्रोल-डीजल की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए उद्योगों और बड़े उपभोक्ताओं पर प्रतिबंध लगा रही है।
जमाखोरी के नाम पर उद्योगों पर बोझ
आलोक दूबे ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार जमाखोरी रोकने के नाम पर उद्योगों और संस्थानों पर अतिरिक्त दवाब डाल रही है। उनका कहना है कि सरकार के दावों और वास्तविकता के बीच बड़ा अंतर है। उन्होंने यह भी कहा कि सरकार को ईंधन आपूर्ति और मूल्य निर्धारण में पारदर्शिता लानी चाहिए ताकि आम जनता और उद्योगों में भरोसा स्थापित किया जा सके।
दूरदर्शी नीति की आवश्यकता
कांग्रेस नेता ने स्पष्ट किया कि उनकी पार्टी जमाखोरी और कालाबाजारी के खिलाफ किसी भी प्रभावी कदम का समर्थन करती है। लेकिन इसके लिए केवल प्रतिबंधों के बजाय एक दूरदर्शी नीति और मजबूत निगरानी तंत्र की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि केवल पाबंदियां लगाकर समस्याओं का समाधान नहीं किया जा सकता।