प्रेम चोपड़ा ने रणवीर सिंह की ‘धुरंधर’ पर दी आदित्य धर को सलाह

मुंबई: बॉलीवुड के अनुभवी अभिनेता प्रेम चोपड़ा ने हाल ही में फिल्म ‘धुरंधर’ के बारे में अपने विचार साझा किए हैं। उन्होंने फिल्म की प्रशंसा की, लेकिन कुछ सुझाव भी दिए। विशेषकर, फिल्म में गालियों और हिंसक तत्वों के उपयोग पर उन्होंने कहा कि निर्माताओं को इन पर थोड़ा संयम बरतना चाहिए। यह बात उन्होंने एक मीडिया वार्ता में कही।

प्रेम चोपड़ा ने ‘धुरंधर’ देखकर रणवीर सिंह की तारीफ की

प्रेम चोपड़ा ने बताया कि उन्होंने फिल्म का पहला भाग देखा था। उन्हें फिल्म अच्छी लगी, लेकिन उन्होंने इसे थोड़ा लंबा भी बताया। हालांकि, उन्होंने यह स्वीकार किया कि फिल्म सफल रही है क्योंकि दर्शक इसे बड़े पैमाने पर पसंद कर रहे हैं। लंबे समय बाद दर्शक फिर से थिएटरों में लौटे हैं।

‘सिनेमा पूरी तरह कमर्शियल’

उन्होंने कहा, ‘फिल्म अच्छी थी, लेकिन यह थोड़ी लंबी थी। फिर भी, यह सफल रही क्योंकि लोगों ने इसे खूब सराहा।’ जब उनसे पूछा गया कि अगर वे खुद ‘धुरंधर’ का निर्देशन कर रहे होते तो क्या वे हिंसक दृश्यों और गालियों को कम करते, तो प्रेम चोपड़ा ने जवाब दिया कि सिनेमा पूरी तरह से कमर्शियल है और यह उस ट्रेंड का पालन करता है जो दर्शक पसंद करते हैं।

मैं गालियों और ऐसी चीजों पर धीरे चलने की सलाह जरूर देता

उन्होंने आगे कहा, ‘मैं फिल्म को मौजूदा ट्रेंड के अनुसार बनाता, लेकिन हां, मैं गालियों और ऐसी चीजों पर धीरे चलने की सलाह जरूर देता।’ प्रेम चोपड़ा ने फिल्म के कलाकारों की भी प्रशंसा की, विशेषकर रणवीर सिंह और अक्षय खन्ना की परफॉर्मेंस को।

उन्होंने याद किया कि पहले वे रणवीर सिंह को क्लब में देखा करते थे जब वह ब्रेक लेने की कोशिश कर रहे थे। अब उनकी परफॉर्मेंस देखकर वे दंग रह गए। प्रेम चोपड़ा ने कहा, ‘मैं रणवीर सिंह को क्लब में देखता था। उनकी परफॉर्मेंस देखकर मैं हैरान रह गया। यह कहना कठिन है कि कौन बेहतर था क्योंकि हर कलाकार ने अपनी भूमिका में बेहतरीन प्रदर्शन किया।’

अक्षय खन्ना की एक्टिंग को भी प्रेम चोपड़ा ने विशेष रूप से सराहा। उन्होंने कहा कि फिल्म में हर किसी ने अपने रोल को अच्छे से निभाया है, इसी कारण से फिल्म दर्शकों को पसंद आई। प्रेम चोपड़ा ने पुराने और नए सिनेमा की तुलना भी की। उन्होंने कहा कि पहले की फिल्में अधिक इमोशनल और कहानी पर आधारित होती थीं, जिनमें राजेश खन्ना और अमिताभ बच्चन जैसे सितारे चमकते थे। आज की फिल्में अधिकतर उच्च तीव्रता, एक्शन और स्पेक्टेकल पर केंद्रित होती हैं। दर्शकों की पसंद और बदलते ट्रेंड ने फिल्म निर्माण को नया रूप दिया है।

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