रांची में होली से पूर्व छापेमारी, पनीर एवं मिठाई के सैंपल जांच के लिए भेजे गए

कैसे बनता है मिलावटी पनीर और मिठाई?

विशेषज्ञों का कहना है कि बढ़ती मांग और लाभ की मानसिकता के कारण कुछ असामाजिक तत्व अस्वास्थ्यकर तरीकों का सहारा लेते हैं। पनीर निर्माण में सामान्य दूध के स्थान पर स्किम्ड मिल्क पाउडर, स्टार्च, सिंथेटिक दूध या डिटर्जेंट मिश्रित घोल का उपयोग किया जाता है। साथ ही, आकर्षक सफेदी के लिए पनीर में रसायनों को मिलाने की भी प्रवृत्ति देखी जाती है। इसी तरह, खोआ में वनस्पति घी, आलू का पेस्ट, मैदा या स्टार्च मिलाया जाता है। मिठाइयों में अक्सर कृत्रिम रंग, सस्ते फ्लेवर और निम्न गुणवत्ता वाले तेल-घी का प्रयोग किया जाता है। बासी मिठाइयों को ताजा बताकर बेचने के लिए उन्हें पुनः तलकर या चाशनी में डुबोकर पेश किया जाता है। हाल ही में, हिनू से बिरसा चौक तक की जांच में नौ दुकानदारों पर मिलावट करने के आरोप में कार्रवाई की गई थी।

स्वास्थ्य पर गंभीर असर

राजेंद्र आयुर्विज्ञान संस्थान (रिम्स) के पूर्व विभागाध्यक्ष डॉ. बी कुमार का कहना है कि मिलावटी खाद्य पदार्थ सीधे पाचन तंत्र पर नकारात्मक असर डालते हैं। ऐसे पनीर और मिठाइयों के सेवन से फूड प्वाइजनिंग, उल्टी, दस्त, पेट दर्द, एलर्जी, और त्वचा पर रैशेज जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है।

Leave a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Scroll to Top