संगाजाता गांव में स्वतंत्रता दिवस का जश्न
जब देश 80वां स्वतंत्रता दिवस मनाने की तैयारी कर रहा था, तब झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम जिले के एक दूरदराज के गांव संगाजाता में सुबह 6 बजे से ही दोहरी खुशी का माहौल था। यह गांव अरहासा पंचायत के अंतर्गत आता है और यह घने सारंडा-कोल्हान जंगलों में स्थित है। इस क्षेत्र की दुर्गमता इतनी अधिक है कि बारिश के मौसम में यहाँ का संपर्क अन्य स्थानों से पूरी तरह कट जाता है। इस बार संगाजाता गांव ने सिर्फ देश की आजादी का जश्न नहीं मनाया, बल्कि नक्सलवाद के आतंक से मिली अपनी स्वतंत्रता का भी उत्सव मनाया।
नक्सलवाद से छुटकारा
संगाजाता गांव कभी नक्सलियों का एक प्रमुख गढ़ था, जहाँ लगभग 90 से 100 नक्सली सक्रिय थे, जिनमें से करीब 15 नक्सली इस गांव में रहते थे। इनमें कुख्यात माओवादी सगन अंगरिया भी शामिल था, जिस पर 5 लाख रुपये का इनाम घोषित था और उसके खिलाफ 124 आपराधिक मामले दर्ज थे। इन नक्सलियों पर सुरक्षा बलों और आम नागरिकों पर हमले, आईईडी विस्फोट, हत्या और रंगदारी जैसे गंभीर आरोप लगे थे। इस क्षेत्र में अतीत में कई बड़ी मुठभेड़ें भी हुई हैं, जिनमें सुरक्षा बलों और नक्सलियों के बीच गंभीर टकराव शामिल हैं।
स्थानीय लोगों का संघर्ष
नक्सलियों का आतंक सिर्फ सक्रिय नक्सलियों तक सीमित नहीं था, बल्कि इस पंचायत में रहने वाले कई ग्रामीणों पर भी नक्सल समर्थक और ओवर ग्राउंड वर्कर (OGW) होने का दबाव था। पिछले दो दशकों में स्थानीय लोगों के बीच नक्सलियों का भय बरकरार रहा, जिससे नक्सली हिंसा का सबसे बुरा असर ग्रामीणों पर पड़ा। इस क्षेत्र में नक्सली हिंसा के कारण 40 से अधिक नागरिकों की जान गई, और ग्रामीणों को नक्सलियों को सहायता प्रदान करने के लिए मजबूर किया गया। इसके चलते ग्रामीणों और पुलिस के बीच अविश्वास और तनाव की स्थिति लंबे समय तक बनी रही।